चन्दौली चहनियाँ,
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अघोराचार्य बाबा कीनाराम की जन्मस्थली रामगढ़ एवं बाबा कीनाराम मठ को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए गुरेरा से नादी निधौरा तक सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत मार्ग में पड़ने वाली सभी पुलियों, बाहा एवं बानगंगा ड्रेन पर बने पुल का भी चौड़ीकरण प्रस्तावित है। लेकिन बानगंगा ड्रेन पर स्थित पुल की चौड़ाई और ऊंचाई बढ़ाये बिना निर्माण कार्य कराए जाने के विरोध में गुरुवार को किसानों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा।
नाराज ग्रामीणों ने गुरेरा वाया रामगढ़ मार्ग पर काम रूकवाकर लगभग दो घंटे तक जाम लगाकर जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग एवं निर्माण एजेंसी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि बानगंगा ड्रेन पर बना पुल वर्षों से संकरा और नीचा है।
बरसात के दिनों में क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जाता है, जिससे रामगढ़, रइया, बैराठ, बरिया, महमदपुर, कूरा समेत आसपास के गांवों के किसानों और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि सड़क तो चौड़ी कर दी जाएगी और पुल को उसी पुराने स्वरूप में छोड़ दिया गया, तो भविष्य में बाढ़ और जलनिकासी की समस्या और गंभीर हो जाएगी ।
किसानों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन देकर पुल को पर्याप्त चौड़ा और ऊंचा बनाए जाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार ठेकेदार निर्माण कार्य शुरू करने पहुंचे, लेकिन हर बार किसानों ने पुल का डिज़ाइन बदले बिना कार्य रुकवा दिया। ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन भेजकर पुनः निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया गया।
इसकी सूचना मिलते ही रामगढ़ सहित आसपास के दर्जनों गांवों के किसान सुभाष सिंह ‘फौजी’ एवं गोपाल पाण्डेय के नेतृत्व में मौके पर पहुंच गए। किसानों ने पहले निर्माण कार्य रुकवाया और उसके बाद गुरेरा–रामगढ़ मार्ग पर जाम लगा दिया।
देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए, जिससे लगभग दो घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। अंततः विरोध बढ़ता देख ठेकेदार को जेसीबी मशीन वापस बुलानी पड़ी और निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता सुभाष सिंह ‘फौजी’ ने कहा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की वर्षों पुरानी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। कहा कि बानगंगा ड्रेन का यह पुल पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इसे पर्याप्त चौड़ा और ऊंचा नहीं बनाया गया तो हर वर्ष हजारों बीघा कृषि भूमि और आसपास के गांव बाढ़ के खतरे में रहेंगे।
किसानों की सुरक्षा और क्षेत्र के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जब तक पुल का वैज्ञानिक तरीके से चौड़ीकरण और ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक इस पुल पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
यदि जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो किसान आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।। चेतावनी दी कि पुल के डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन किए बिना किसी भी कीमत पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से सुभाष सिंह,गोपाल पाण्डेय, अशोक पाण्डेय, पवन सिंह, सामवर पाठक,जय प्रकाश पाण्डेय,दुखभंजन पाठक, मनोज सिंह, बालेश्वर सिंह, विक्रमा मौर्य, मिंकू पाण्डेय, राजकुमार सिंह, प्रभुनाथ पाण्डेय, अर्पित पाण्डेय, रिंकू यादव, आकाश सिंह, अंश सिंह, अरुण यादव, विनय सिंह, राजू सिंह, मुलायम यादव, ऋषिकेश यादव , धनंजय मौर्य, सुनील मौर्य, दूधनाथ मौर्य सहित सैकड़ों किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।











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