रेडियोबायोलॉजी पर दो दिवसीय लघु पाठ्यक्रम

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वाराणसी, 27.06.2026:

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान के रेडियोथेरेपी एवं विकिरण चिकित्सा विभाग द्वारा शनिवार को “रेडियोबायोलॉजी: अवधारणाएँ एवं अनुप्रयोग” विषय पर दो दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इस पाठ्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से आए लगभग 70 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं युवा पेशेवर भाग ले रहे हैं।

इस दौरान रेडियोबायोलॉजी में हालिया प्रगति एवं उभरते अनुप्रयोगों पर चर्चा की जाएगी।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में किया। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी कक्षा या शैक्षणिक कार्यक्रम में सीखने की गुणवत्ता केवल वक्ता पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी पर भी निर्भर करती है।

उन्होंने प्रतिभागियों को जिज्ञासु बने रहने, प्रश्न पूछने तथा विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर पाठ्यक्रम का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षक और शिक्षार्थियों के बीच मजबूत संवाद आवश्यक है तथा सहभागिता और जिज्ञासा सीखने की प्रक्रिया को और अधिक समृद्ध बनाती है।

प्रो. चतुर्वेदी ने रेडियोथेरेपी एवं रेडिएशन मेडिसिन विभाग को शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी केंद्रों में स्थापित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी विकास योजना तैयार करने के लिए प्रेरित किया तथा मेडिकल फिजिक्स में एम.एससी. कार्यक्रम प्रारम्भ करने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि संबंधित संस्थान इसके क्रियान्वयन की संभावनाओं पर मिलकर कार्य करें।

प्रो. सत्यजीत प्रधान, पूर्व निदेशक ,टाटा मेमोरियल सेंटर, वाराणसी ने रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के तीन प्रमुख स्तंभों क्लीनिकल ज्ञान, रेडियोबायोलॉजी और मेडिकल फिजिक्स के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रेडियोथेरेपी के सिद्धांतों और अनुप्रयोगों को समझने के लिए रेडियोबायोलॉजी की सुदृढ़ समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने तथा विशेषज्ञों से सीखकर विषय की अपनी समझ को और गहरा करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन अध्यक्ष प्रो. ललित एम. अग्रवाल के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने रेडियोथेरेपी के क्षेत्र में शैक्षणिक समझ और व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने में इस अल्पकालिक पाठ्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रो. संजय गुप्ता, संकाय प्रमुख, चिकित्सा संकाय, ने इस अल्पकालिक पाठ्यक्रम के आयोजन के लिए रेडियोथेरेपी एवं रेडिएशन मेडिसिन विभाग की पहल की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने की।
कार्यक्रम का समापन पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. सुनील चौधरी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, देहरादून के निदेशक एवं एम्स ऋषिकेश के पूर्व डीन प्रो. मनोज गुप्ता ने कैंसर उपचार में विकिरण के नैदानिक अनुप्रयोगों तथा प्रभावी रेडियोथेरेपी पद्धतियों के महत्व पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया।

दो दिवसीय इस अल्पकालिक पाठ्यक्रम में व्याख्यानों और विशेषज्ञों के साथ शैक्षणिक संवाद के माध्यम से रेडियोथेरेपी, रेडियोबायोलॉजी तथा उनके नैदानिक अनुप्रयोगों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा रही है।

 

रिपोर्ट – विजयलक्ष्मी तिवारी

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