वाराणसी
धर्मनगरी वाराणसी में बिना परमिट संचालित ऑटो, ई-रिक्शा और बाइक टैक्सियों का मुद्दा अब बड़ा प्रशासनिक और राजस्व संबंधी सवाल बनता जा रहा है। आरोप है कि शहर में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही, शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा रही है और अपराध की घटनाओं को भी बढ़ावा मिलने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, शहर में सिटी परमिट वाले करीब 4,200 ऑटो को संचालन की अनुमति है, जबकि दावा किया जा रहा है कि वास्तविकता में ऑटो और ई-रिक्शा की संख्या लगभग एक लाख तक पहुंच चुकी है। यदि यह दावा सही है, तो यह परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और व्यस्त मार्गों पर हर दिन लगने वाले भीषण जाम के लिए भी बड़ी संख्या में अवैध रूप से संचालित वाहनों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाता है, लेकिन कार्रवाई का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता।
इस बीच कुछ सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि बिना परमिट चलने वाले ऑटो चालकों से कथित रूप से प्रति वाहन ₹2,000 तक की अवैध वसूली की जाती है और यह रकम नीचे से ऊपर तक पहुंचने की बात कही जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी प्रकार, गोदौलिया क्षेत्र में कुछ बाइक चालकों से भी कथित रूप से धन लेकर संचालन की अनुमति दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और परिवहन विभाग पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए अवैध संचालन और कथित भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई करते हैं या नहीं। शहरवासियों की मांग है कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि यातायात व्यवस्था सुधरे, राजस्व की हानि रुके और आम लोगों को जाम की समस्या से राहत मिल सके।









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