टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 11 मरीजों में टीबी की पुष्टि, समय पर जांच और इलाज ही बचाव: डॉ. एस.के. चतुर्वेदी

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चन्दौली पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय)

टीबी (क्षय रोग) के प्रति लोगों को जागरूक करने और मरीजों की समय रहते पहचान करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राजकीय महिला चिकित्सालय, मुगलसराय द्वारा लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने बताया कि गांव-गांव में शिविर लगाकर हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि अब तक अभियान के तहत 2,634 लोगों ने शिविरों में पहुंचकर जांच कराई है। इनमें से 1,461 संभावित मरीजों का एक्स-रे किया गया, जिनमें 11 मरीजों में टीबी के लक्षणों की पुष्टि हुई है। सभी चिन्हित मरीजों को आवश्यक उपचार और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि टीबी एक ड्रॉपलेट संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के माध्यम से फैल सकता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई दें तो उसे छिपाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज शुरू होने से मरीज की संक्रमण फैलाने की क्षमता काफी हद तक कम हो जाती है और बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी टीबी को लेकर कई तरह के भ्रम और गलत धारणाएं मौजूद हैं। कुछ लोग इसे छुआछूत की बीमारी मानते हैं और मरीजों से दूरी बनाने लगते हैं, जबकि ऐसा करना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है और मरीजों के प्रति भेदभाव करने के बजाय उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा दिलाने में सहयोग करना चाहिए।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने कहा कि जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार के जरिए ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार के भ्रम में न पड़ने तथा टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में संपर्क करने की अपील की।

 

रिपोर्ट – आलिम हाशमी

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