वाराणसी:
कमिश्नरेट वाराणसी में बाउंसरों का बढ़ता दबदबा अब आम लोगों के लिए डर और दहशत का कारण बनता जा रहा है। ताज़ा मामला शिवपुर थाना क्षेत्र के शुद्धिपूर इलाके से सामने आया है, जहाँ एक प्रॉपर्टी विवाद में कथित तौर पर एक पक्ष दर्जनों बाउंसरों को लेकर मौके पर पहुंच गया। इलाके में अचानक भारी संख्या में पहुंचे बाउंसरों को देखकर स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई सूचना मिलते ही शिवपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। वहीं अपुष्ट जानकारी के अनुसार विवाद और धक्का-मुक्की के दौरान एक महिला के घायल होने की भी खबर सामने आ रही है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में बाउंसरों का इस्तेमाल अब सुरक्षा से ज्यादा दबंगई और कब्जेदारी के लिए किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में ये तथाकथित बाउंसर खुलेआम कानून हाथ में लेने का दुस्साहस कर रहे हैं?
बीते दिनों नमो घाट पर एक बच्चे की पीट-पीटकर हत्या के मामले में भी बाउंसरों की भूमिका सामने आने के बाद पूरे शहर में आक्रोश है। इसके बावजूद शहर में बिना सत्यापन और बिना जवाबदेही के बाउंसरों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
* क्या वाराणसी में बाउंसरों का कोई पुलिस सत्यापन होता है?
* क्या इनके चरित्र और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाती है?
* आखिर कितनी और जान जाने के बाद
प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा?
जनता की मांग है कि कमिश्नरेट पुलिस तत्काल शहर में सक्रिय सभी बाउंसर एजेंसियों और निजी बाउंसरों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाए। बिना पुलिस वेरिफिकेशन और चरित्र प्रमाणन के किसी को भी बाउंसर के रूप में काम करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो “सुरक्षा” के नाम पर खड़े ये बाउंसर आने वाले समय में कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।









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