वाराणसी।
कमिश्नरेट पुलिस पर एक बड़ा दाग लगाते हुए न्यायालय ने दो दरोगाओं के खिलाफ आभूषण गबन जैसे गंभीर मामले में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
जगतगंज (थाना चेतगंज) निवासी सीता चौहान ने अपने अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे के माध्यम से कोर्ट में गुहार लगाई थी। आरोप है कि 28 फरवरी 2025 को एक मामले की जांच के दौरान दरोगा अभिषेक त्रिपाठी और जागृति गिरी ने उन्हें और एक अन्य महिला को थाने में जबरन बैठाए रखा।
गहनों की ‘जबरन वसूली’ का आरोप
पीड़िता का कहना है कि दरोगाओं ने उनके परिवार को डरा-धमकाकर पुश्तैनी गहने मंगवा लिए। इन गहनों को पुलिस ने ‘चोरी का माल’ बताया, जबकि उनके पास ज्वेलरी के पक्के बिल मौजूद हैं। यहां तक कि शादी के लिए बनवाए गए गहने भी जांच के नाम पर छीन लिए गए।
धमकी, गाली और फर्जी बरामदगी का दावा
सीता चौहान ने आरोप लगाया कि गहने वापस मांगने पर उन्हें गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़िता के अनुसार, उनके पास कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। साथ ही पुलिस पर फर्जी बरामदगी दिखाने के लिए वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया गया है।
कोर्ट का सख्त रुख
पीड़िता ने पहले पुलिस आयुक्त से भी शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर मामला कोर्ट पहुंचा। अब न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों दरोगाओं के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दे दिया है। इस आदेश के बाद वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे महकमे में हलचल तेज हो गई है।










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