जनपद अम्बेडकरनगर के विकास खंड जहांगीरगंज अंतर्गत बीआरसी देवरिया बुजुर्ग एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। उच्च प्राथमिक विद्यालय नरियांव के मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) खाते से वर्ष 2021 से मार्च 2025 के बीच तीन लाख रुपये से अधिक की धनराशि निकाले जाने का मामला सामने आया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह धनराशि ओमप्रकाश पुत्र स्व. नरमुन, निवासी ग्राम पंचायत तिलक टांडा, द्वारा चेक के माध्यम से आहरित की गई।
आरोप यह भी है कि संबंधित व्यक्ति न तो विद्यालय का कर्मचारी है, न अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और न ही खाद्यान्न आपूर्ति से जुड़ा कोई पंजीकृत विक्रेता। यदि यह तथ्य सत्य पाए जाते हैं तो मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का गंभीर उदाहरण माना जाएगा।
जिस पर आरोप, वही बना जांचकर्ता।निष्पक्षता पर उठे सवाल शिकायतकर्ता पी.क., निवासी ग्राम पंचायत मुबारकपुर पिकार, ने उच्चाधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि मामले की जांच उसी खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय को सौंप दी गई, जिन पर संरक्षण देने और अनियमितताओं की अनदेखी करने के आरोप हैं।
शिकायत संख्या 40017826004191 की सुनवाई 11 फरवरी 2026 को प्रस्तावित बताई जा रही है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी स्वयं विवेचक बनकर अपनी ही शिकायत की सुनवाई और निस्तारण कर रहे हैं, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि एमडीएम खाते में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बावजूद अब तक न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इससे पूरे प्रकरण को दबाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
डीएम स्तर पर भी सन्नाटा, प्रशासनिक चुप्पी पर जनाक्रोश
मामला मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंचने के बावजूद अब तक किसी स्वतंत्र, उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच की घोषणा नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, जिससे भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित अधिकारी लगभग तीन वर्षों से एक ही विकास खंड में तैनात हैं। उन पर भ्रामक आख्या भेजने, सेवा अभिलेखों में कूटरचना करने तथा शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जनहित से जुड़ी एमडीएम जैसी महत्वपूर्ण योजना में कथित अनियमितताओं के बावजूद जवाबदेही तय न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराकर दोष सिद्ध होने पर कठोर विधिक कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि इस बहुचर्चित मामले में पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई कब तक सुनिश्चित की जाती है।
रिपोर्ट – पंकज कुमार











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