भक्त के बिना भगवान अधुरे है।भक्त की भक्ति रूपी साधना ही भगवान् को प्रतिष्ठित करती है। चारों युगों के भक्तों की श्रृंखला माला ही भक्तमाल कथा है। यह विचार वृन्दावन से पधारे कथा व्यास रसिकाचार्य स्वामी किशोरदास देव,गोरीलाल कुंज श्रीधाम के हैं, जो वे सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में संकटमोचन संकीर्तन मंडल द्वारा सात दिवसीय भक्तमाल कथा का शुभारंभ में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रीभक्तमाल ग्रन्थ के रचियता नाभादास जी महाराज है। भक्तमाल कथा में भगवान् के प्रति भक्तों का समर्पण और उनकी दिव्य भक्ति का दर्शन हैं।
इस ग्रन्थ की यह विशेषता है कि इसमें सभी संप्रदयाचार्यों एवं सभी सम्प्रदायों के संतो का समान भाव से श्रद्धापूर्वक संस्मरण किया गया है।इसमें चारों युगों के भक्तों का वर्णन हैं। ध्रुव, प्रहलाद, द्वादश प्रधान भक्त सूर, कबीर, तुलसी, मीरा, ताजदेवी आदि अनेकों भक्तो की माला ही भक्तमाल है। उन्होंने कहा कि भगवान् की कथा भक्त सुनते हैं, तो भक्तों की कथा स्वयं भगवान् सुनते हैं।भगवान् अपने से अधिक भक्तों को आदर देते हैं। भगवान् अपने भक्तों तथा सन्तो के हैं।
इस अवसर पर मलूक पीठाधीश्वर पूज्य राजेंद्रदास महाराज उपस्थित रहे।कथा से पूर्व कथाव्यास ने हनुमान प्रसाद पोद्दार के आदमकद मूर्ति पर माल्यार्पण किया। प्रातः में संकटमोचन सत्संग मंडली द्वारा हरिनाम संकीर्तन किया गया। व्यासपीठ का पूजन आरती शिवकुमार, अखिलेश खेमका ने किया।इस अवसर पर विजय कुमार मिश्र, नीरज दुबे,बलदाऊ पाठक, श्याम अग्रवाल, सुशील अग्रवाल सहित काफी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।








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