वाराणसी
चितईपुर थाना क्षेत्र के महामना नगर कॉलोनी, सुंदरपुर में जमीन पर कब्जे और निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद सामने आया है। मामले में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से जारी आदेश के अनुसार, संबंधित भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कार्य किए जाने पर कार्रवाई की गई है। वहीं, दोनों पक्ष जमीन के स्वामित्व और आराजी नंबर को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
वीडीए के पत्रांक एन-244/23 (नो.)/वि.प्रा./भवन/2026-27, दिनांक 21 अगस्त 2026 के आदेश में कहा गया है कि रमेश जायसवाल, आशीष अग्रवाल और रजनी अग्रवाल पत्नी आनंद कुमार अग्रवाल आदि द्वारा महामना नगर कॉलोनी में करीब 50×60 फीट क्षेत्रफल में भूतल पर कॉलम का निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृत कराए शुरू किया गया। आदेश के मुताबिक, पूर्व में भी अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध नोटिस की कार्रवाई करते हुए 1 जुलाई 2024 को स्थल को सील किया गया था। वीडीए का आरोप है कि वर्तमान में सील तोड़कर भूतल पर शटरिंग का कार्य किया जा रहा था। इसी आधार पर स्थल को पुनः सील करने का आदेश दिया गया है।

आदेश में उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14 और धारा 28(क)(1) का उल्लेख करते हुए बिना अनुमति निर्माण पर रोक का प्रावधान बताया गया है। अवर अभियंता रोहित कुमार को 21 अगस्त 2026 को स्थल सील कर अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चितईपुर थाना प्रभारी से सीलिंग के दौरान मौके पर उपस्थित रहने और सील सुरक्षित रखने में सहयोग करने को कहा गया है।
दूसरे पक्ष ने उठाए वीडीए की कार्रवाई पर सवाल
आनंद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि महामना नगर में उनका प्लॉट आराजी नंबर 66/2 है और जमीन की पैमाइश कानूनगो व लेखपाल द्वारा मौके पर की जा चुकी है। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों में नामांतरण और विरासत की कार्रवाई भी जमीन का निरीक्षण करने के बाद हुई है। उन्होंने वीडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला जमीन के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों से जुड़ा है, ऐसे में वीडीए की भूमिका को लेकर उन्हें आपत्ति है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थल को सील किए जाने की सूचना उन्हें नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि किसी निर्माण स्थल पर नोटिस चस्पा किया जाता है तो उस पर संबंधित आराजी नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए, जबकि यहां चस्पा नोटिस पर आराजी नंबर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर उनकी जमीन पर निर्माण में हस्तक्षेप नहीं करने की मांग की।

सुनीता ने पैतृक जमीन पर कब्जे का लगाया आरोप
वहीं, प्रथम पक्ष की सुनीता का कहना है कि आराजी नंबर 64/1 और 64/2 उनकी पैतृक जमीन है। उनका आरोप है कि आशीष अग्रवाल की रजिस्ट्री आराजी नंबर 66 में है, लेकिन इसके बावजूद उनकी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। सुनीता ने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों और मौके की पैमाइश के आधार पर विवाद का समाधान कराने की मांग की।
सुनीता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
पड़ोसी ने भी प्रशासन से कार्रवाई की मांग की
सुनीता के पड़ोसी नीरज केशरी ने भी जमीन को पैतृक संपत्ति बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल पूरे विवाद का केंद्र आराजी नंबर 64/1, 64/2 और 66/2 से संबंधित भूमि की स्थिति, स्वामित्व तथा निर्माण की वैधता है। वीडीए के आदेश में निर्माण को अनधिकृत बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई का उल्लेख है, जबकि दोनों पक्ष राजस्व अभिलेखों और अपनी-अपनी जमीन के दावे को लेकर अलग-अलग बातें सामने रख रहे हैं। ऐसे में राजस्व अभिलेख, मौके की आधिकारिक पैमाइश और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











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