लखनऊ
उत्तर प्रदेश में देर रात 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए। शासन की ओर से जारी स्थानांतरण सूची के बाद प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों की पुलिस कमान में बदलाव हुआ है। किसी अधिकारी को एक जिले से दूसरे जिले की जिम्मेदारी मिली है। तो किसी को पुलिस मुख्यालय में नई भूमिका सौंपी गई है।
लेकिन इन आदेशों को केवल प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखना शायद उन अधिकारियों के समर्पण के साथ न्याय नहीं होगा, जो अपने परिवार से दूर रहकर दिन-रात प्रदेश की करोड़ों जनता की सुरक्षा और सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।
2014 बैच के आईपीएस विनीत जायसवाल को पुलिस अधीक्षक गोण्डा से हटाकर पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर बनाया गया है। वहीं आईपीएस चारू निगम को पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर से पुलिस अधीक्षक, यूपी-112 लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2015 बैच के आईपीएस अविनाश पाण्डेय को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के पद से हटाकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध किया गया है। वहीं बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ बनाया गया है।
इसी क्रम में आईपीएस अभिषेक को पुलिस अधीक्षक बिजनौर से पुलिस अधीक्षक गोण्डा, जबकि 2017 बैच के आईपीएस विकास कुमार को पुलिस अधीक्षक बलरामपुर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी की जिम्मेदारी दी गई है।
2018 बैच के आईपीएस कृष्ण कुमार को पुलिस अधीक्षक सम्भल से पुलिस अधीक्षक बिजनौर भेजा गया है। वहीं विकास चन्द्र त्रिपाठी को पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस अधीक्षक बाराबंकी से पुलिस अधीक्षक सम्भल तथा मार्तण्ड प्रकाश सिंह को पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस अधीक्षक हरदोई से पुलिस अधीक्षक बलरामपुर बनाया गया है।
वर्दी के पीछे एक परिवार भी होता है।
इन नामों के पीछे केवल पद और रैंक नहीं हैं। इनके पीछे ऐसे परिवार हैं। जिनके अपने लोग महीनों और कई बार त्योहारों पर भी घर से दूर रहते हैं। जब अधिकांश परिवार अपने प्रियजनों के साथ सुख-दुख बांट रहे होते हैं। तब पुलिस और प्रशासन से जुड़े हमारे अधिकारी और कर्मचारी किसी अनजान नागरिक की सुरक्षा के लिए सड़क पर खड़े दिखाई देते हैं।
उनकी ड्यूटी की कोई आसान घड़ी नहीं होती। कभी कानून-व्यवस्था की चुनौती, कभी अपराध के खिलाफ कार्रवाई, कभी वीआईपी ड्यूटी और कभी किसी पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने की जिम्मेदारी—हर परिस्थिति में उनसे संयम, साहस और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।
तबादला उनके लिए सिर्फ एक आदेश नहीं, बल्कि जनसेवा का नया मोर्चा होता है।
आज गोण्डा है। तो कल सुल्तानपुर। आज झांसी है। तो कल मेरठ। जगह बदलती है। जिम्मेदारी बदलती है। लेकिन वर्दी पहनकर जनता की सुरक्षा का संकल्प नहीं बदलता।
सलाम उन परिवारों को भी
हम अक्सर पुलिस अधिकारी को सलाम करते हैं। लेकिन उस सलाम में उस परिवार की भूमिका भी शामिल होनी चाहिए, जो अपने पिता, पति, भाई या बेटे को देश और प्रदेश की सेवा के लिए घर से विदा करता है।
कई बार फोन पर कुछ मिनट की बातचीत ही परिवार के लिए मुलाकात बन जाती है। बच्चों के बड़े होने के पल छूट जाते हैं। त्योहार ड्यूटी में निकल जाते हैं। और निजी खुशियां भी कभी-कभी सरकारी जिम्मेदारियों के आगे छोटी पड़ जाती हैं।
फिर भी अगले दिन वही अधिकारी वर्दी पहनकर निकलता है। क्योंकि उसके लिए लाखों अनजान लोग भी अपने हैं।
नई जिम्मेदारी, नई उम्मीद
इन 9 आईपीएस अधिकारियों की नई तैनाती के साथ संबंधित जिलों की जनता की भी नई उम्मीदें जुड़ी हैं। कानून-व्यवस्था मजबूत हो, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण हो, पीड़ित को समय पर न्याय मिले और आम नागरिक को पुलिस पर भरोसा महसूस हो यही किसी भी जिम्मेदारी की वास्तविक सफलता होगी।
पद बदलते हैं। जिले बदलते हैं। लेकिन जनता की सुरक्षा का धर्म नहीं बदलता।
इसलिए इन सभी अधिकारियों के लिए यह सिर्फ स्थानांतरण आदेश नहीं, बल्कि जनता की सेवा का एक नया अध्याय है।
उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से उन सभी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और उनके परिवारों को नमन, जो अपने निजी सुख से पहले समाज की सुरक्षा और सेवा को स्थान देते हैं।
आप जहां भी जाएं, कानून का राज मजबूत हो, जनता का विश्वास बढ़े और आपकी वर्दी हमेशा इंसानियत, साहस और न्याय की पहचान बनी रहे।
सलाम आपकी ड्यूटी को।
सलाम आपके जज्बे को।
और उससे भी बड़ा सलाम उन परिवारों को, जो अपने अपनों को देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित करते हैं।











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