सीवीओ की फटकार बेअसर, नीबी गहरवार गौशाला में फिर दो गोवंश की मौत; ग्राम प्रशासक पर भी मिलीभगत का आरोप

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जिगना (मिर्जापुर)

जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेन्द्र कुमार पाठक द्वारा नीबी गहरवार गो-वंश आश्रय स्थल के औचक निरीक्षण और संचालक को फटकार लगाए जाने के 24 घंटे के भीतर ही गौशाला की पोल फिर खुल गई है। गुरुवार को हुई सख्ती के बाद भी हालात जस के तस हैं और आज फिर गौशाला में दो गायें मृत पाई गईं।

ग्रामीणों की शिकायत पर आज दिनांक 21 अगस्त को वीडियो रामपाल, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुभाष और पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. शेन सिंह जांच करने गौशाला पहुंचे, जहां दो गोवंश मृत अवस्था में मिले।

बताया जा रहा है कि इस गो-वंश आश्रय स्थल का संचालन सागर एंटरप्राइजेज के संचालक विकास कुमार मौर्य द्वारा किया जा रहा है। परिसर में ही गो-संरक्षण के लिए नियुक्त नीरज सिंह, अलावती देवी सहित कुल 12 कर्मचारी निवास करते हैं, जिनके ऊपर पूरे आश्रय स्थल की देखरेख की जिम्मेदारी है, इसके बावजूद लगातार गोवंश की मौतें हो रही हैं।

दूध का खेल और कागजों पर गौ-सेवक

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार आश्रय स्थल में कुल 281 गोवंश संरक्षित हैं, जिनमें से लगभग 10 गायें दूध देती हैं, जिनका दूध सुबह-शाम निकाला जाता है। कागजों पर गौ-सेवा के लिए परमिला देवी, दया शंकर यादव, संगीता देवी, रेखा देवी, अनिता देवी, विकास, मुन्ना, शोभनाथ दुबे, शिवमणि शर्मा सहित कई गौ-सेवक नियुक्त दिखाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो दूध का हिसाब पारदर्शी है और न ही कर्मचारी मौके पर सक्रिय हैं।

सीवीओ ने पहले ही पकड़ी थीं खामियां

गौरतलब है कि गुरुवार को सीवीओ के निरीक्षण में पशु आहार की बोरियों पर एक्सपायरी डेट न होना, मानक के अनुसार भूसा न दिया जाना, हरा चारा गायब होना और पूरे परिसर में कीचड़ व गंदगी पाई गई थी। इस पर सीवीओ ने एनजीओ संचालक को जमकर फटकार लगाई थी और रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने की बात कही थी। उस दौरान ग्राम प्रशासक माधुरी सोनकर और एनजीओ संचालक के बीच भुगतान को लेकर नोकझोंक भी सामने आई थी।

निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका पर उठ रहा है। सूत्रों की मानें तो गौशाला को न तो एनजीओ द्वारा मानक के अनुरूप संचालित किया जा रहा है और न ही स्थानीय ग्राम प्रशासन इसे सुचारू रूप से चलने देना चाहता है।

आरोप है कि प्रशासक की साजिश के चलते ही गौशाला में अनियमितताएं बरकरार हैं और जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। एनजीओ और स्थानीय प्रशासन के बीच मिलीभगत से ही गोवंश दम तोड़ रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि गौशाला का संचालन कर रहे सागर एंटरप्राइजेज और मिलीभगत में शामिल निवर्तमान ग्राम प्रशासक की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम कराया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

रिपोर्ट भोलानाथ यादव

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