चंदौली कमालपुर मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति की ओर से 39 वां वार्षिक मानस सम्मेलन द्वारा आयोजित नौ दिवसीय कथा की पांचवीं निशा सोमवार को श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर के परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में कथावाचकों ने प्रभु की लीलाओं का संुदर वर्णन किया।
कथावाचक मानस मर्मज्ञ पं.रामचंद्र दास ने कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति में संयम बनाकर रहना चाहिए। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है। महाप्रभु हनुमान ने रावण का अभिमान तोड़ दिया। पं. रामचंद्र मिश्र ने जटायू चरित्र का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। कहा कि जटायु माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण को भी बलिदान कर दिया। स्त्री के मान सम्मान की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।
पक्षी राज जटायु ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए रावण से युद्ध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। काशी की धरती से पधारी डा. सुधा पांडेय ने कथा की शुरूआत श्रीराम नाम संकीर्तन से की। संगीतमय कथा के माध्यम से उन्होंने मर्यादा पुरूषोत्तम राम के चरित्र का वर्णन किया। माता सबरी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति माता सबरी जैसी करनी चाहिए।
प्रभु श्रीराम का माता शबरी वर्षो तक इंतजार करती रही। माता शबरी को विश्वास था कि एक दिन प्रभु श्रीराम अवश्य आएंगे। इसलिए संकट की घड़ी में भक्त को भगवान पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए। क्योंकि अपने हर भक्त की पुकार अवश्य सुनते है। पं. उदनारायण शास्त्री ने बताया कि विप्र धेनू सुर संत हित लिन्ह मनुज अवतार।
भगवान जिसके लिए पृथ्वी पर अवतार लिए आज उसी की दुर्दशा हो रही है। विप्र बेचारा मारा मारा फिर रहा है। गाय माता प्रतिदिन कट रही है। कलयुग में भगवान की प्रतिमा लोगों के लिए आलमारी की शोभा बन गए है। संत राजनीतिक पचरे में पड़े हुए है।कहा कि मानव को अपना संबंध प्रभु से जोड़ना चाहिए। तभी कल्याण संभव है।
इस मौके पर संस्थापक हरिद्वार सिंह, जयशंकर दुबे, शिवबचन सिंह, रामनगीना सिंह, अधिवक्ता हरेन्द्र प्रताप सिंह, राजनारायण विश्वकर्मा, पंकज तिवारी, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, हरिदास पांडेय, वरूण तिवारी, राज नारायण विश्वकर्मा, एडवोकेट वीर बहादुर सिंह, हृदय नारायण राम, बाल किशुन गुप्ता, सुरेन्द्र नाथ मिश्र आदि मौजूद रहे।









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