मंत्री और पत्रकार: दोनों समाज सुधारक, पर सुविधाओं में बड़ा फर्क

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1. लोकतंत्र के तीन स्तंभों के साथ-साथ लोकतंत्र का प्रहरी कार्यपालिका और प्रेस दोनों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।

2. मंत्री नीति बनाकर समाज सुधारते हैं और पत्रकार उन नीतियों को जनता तक पहुंचाकर जवाबदेही तय करते हैं।

3. यानी दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही है – समाज का भला और देश का विकास।

4. फिर भी जमीनी हकीकत में दोनों को मिलने वाली सुविधाओं में आसमान-जमीन का अंतर दिखता है।

5. एक मंत्री को सरकारी आवास, गाड़ी, सुरक्षा, सचिवालय, पेंशन और तमाम भत्ते मिलते हैं।

6. वहीं एक पत्रकार को खबर के लिए खुद बाइक पर धूप-बारिश में निकलना पड़ता है।

7. मंत्री की सुरक्षा में दर्जनों जवान, पत्रकार की सुरक्षा भगवान भरोसे।

8. मंत्री के इलाज के लिए हेल्थ कार्ड, पत्रकार को प्राइवेट अस्पताल की महंगी फीस खुद भरनी पड़ती है।

9. मंत्री के पास सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस और विज्ञापन का बजट, पत्रकार के पास अखबार की घटती बिक्री।

1. सरकारी विज्ञापन भी बड़े मीडिया हाउस को मिल जाते हैं, छोटे जिले के रिपोर्टर वंचित रह जाते हैं।

2. नतीजा ये कि पत्रकारिता धीरे-धीरे “जोखिम भरा और कम आमदनी वाला” पेशा बन गई है।

3. कई युवा पत्रकार 10-15 हजार की तनख्वाह में परिवार पालने को मजबूर हैं।

4. वहीं विधायक और मंत्री बनते ही जीवनस्तर एकदम बदल जाता है।

5. सवाल ये है कि अगर लोकतंत्र का प्रहरी ही कमजोर रहेगा तो पहले तीन स्तंभों की निगरानी कौन करेगा?

6. शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दे तभी उजागर होते हैं जब पत्रकार जमीनी हकीकत दिखाए।

7. लेकिन संसाधन न होने से कई बार सच दब जाता है और सिर्फ प्रेस रिलीज की खबर छपती है।

8. विशेषज्ञ मानते हैं कि कमजोर पत्रकारिता का सीधा असर नीतियों की गुणवत्ता पर पड़ता है।

9. जब सवाल पूछने वाला ही आर्थिक तंगी से जूझे तो सरकार से कड़े सवाल कैसे पूछेगा?

10. ईमानदारी जनता के सामने लाने का काम सिर्फ और सिर्फ मीडिया ही कर सकता है।

11. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में पत्रकारों को बीमा, पेंशन और सुरक्षा कानून मिले हुए हैं।

12. भारत में अभी तक पत्रकार सुरक्षा कानून भी आधे राज्यों में ही लागू है।

13. सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि जब तक देश की मीडिया की नींव मजबूत नहीं होगी, तब तक देश विकास और तरक्की की असली रफ्तार नहीं पकड़ सकता।

14. क्योंकि बिना मजबूत मीडिया के भ्रष्टाचार छिपेगा, जनता गुमराह होगी और नीतियां कागज तक सीमित रह जाएंगी।

15. अब बड़ा सवाल ये है कि देश का ऐसा कौन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या नेता है जो मीडिया को मजबूत करने और पत्रकारों को बराबर सम्मान देने का खुलकर समर्थन कर सके?

16. क्योंकि जिस देश में पत्रकार मजबूत और ईमानदार होगा, उसी देश का लोकतंत्र, विकास और समाज तीनों मजबूत होंगे!!

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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