यूपी के महाराजगंज में एक गरीब परिवार की दर्द भरी कहानी।
दिव्यांग पिता राजकुमार का ऑटो था, जिस पर ₹24,500 का चालान कट गया। परिवार का एकमात्र सहारा यही ऑटो था — 6 बेटियों और एक बेटे विजय कुमार का।
18 साल के विजय कुमार ने माँ का मंगलसूत्र ज्वेलर के पास बेचकर/गिरवी रखकर सिर्फ ₹13,000 जुटाए। आधे पैसे लेकर ARTO ऑफिस पहुँचा तो उसकी मजबूरी देखकर सबका दिल पसीज गया।
लेकिन फिर जो हुआ…
RTO आर.सी. भारती ने पूरी कहानी सुनी, अपनी जेब से पूरा ₹24,500 चालान भर दिया, ऑटो का बीमा कराया, पढ़ाई छोड़ चुके विजय की पढ़ाई का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली और ऑफिस में काम भी दे दिया।
एक तरफ सख्त नियम, दूसरी तरफ इंसानियत!
कलयुग में ऐसे अधिकारी भी हैं, जो भगवान का रूप बन जाते हैं











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