सांसद वीरेंद्र सिंह ने संसद में उठाया किसानों और छोटे निवेशकों की डूबी पूंजी का मुद्दा; सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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चन्दौली बबुरी ।

लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने आज संसद में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) बिल पर चर्चा के दौरान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूर्वांचल सहित देश भर के लाखों गरीब किसानों और मजदूरों की मेहनत की कमाई के डूबने पर गहरी चिंता व्यक्त की और सरकार की चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए।

कॉर्पोरेट को राहत, गरीबों पर मार
सांसद वीरेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि जहाँ यह कानून बड़े कॉर्पोरेट घरानों को राहत देने का माध्यम बन रहा है, वहीं देश का आम नागरिक आज भी विभिन्न चिटफंड और निवेश कंपनियों में फंसी अपनी गाढ़ी कमाई को वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने एजेंटों के माध्यम से गांव-गांव जाकर दोगुना मुनाफे का लालच देकर हजारों करोड़ रुपये का निवेश कराया और अब वे कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं।

“गोह पराईल, मुसहरे के घरे गइल” – कहावत से कसा तंज
सदन में अपनी बात को मजबूती से रखते हुए सांसद ने एक स्थानीय कहावत का जिक्र किया: “गोह पराईल, मुसहरे के घरे गइल”। इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पैसा तो वापस आया, लेकिन वह ऐसी जगह (सहकारिता विभाग के बैंकों) में फंस गया है

जहाँ से उसे निकालना आम जनता के लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संपत्तियां बेचकर धन तो एकत्र किया, लेकिन वह सीधे निवेशकों के खातों में भेजने के बजाय कागजी प्रक्रियाओं में उलझा दिया गया है।

मुख्य बिंदु:
सवालों के घेरे में सरकार:
* कंपनियों की संपत्ति बेचकर भी निवेशकों को पैसा न मिलने पर उठाए सवाल।
* सामाजिक न्याय का मुद्दा: इसे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का गंभीर प्रश्न बताया।
* आंदोलन की चेतावनी: सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो समाजवादी पार्टी जिला स्तर पर व्यापक प्रदर्शन और आंदोलन करेगी। प्रेस नोट के अंत में उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष तेज किया जाएगा।

 

रिपोर्ट अलीम हाशमी

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