सोनभद्र जिले में एक ऐसे ‘किरदार’ का पर्दाफाश हुआ है जो हकीकत में तो नहीं, लेकिन बातों में खुद को किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का हीरो समझ रहा था। खुद को इंटरनेशनल फिल्म प्रोड्यूसर और मानवाधिकारों का स्वयंभू रक्षक बताने वाले लॉरेंस एंथोनी का ‘सिस्टम’ पुलिस ने हिला कर रख दिया है।
क्या था मामला? (फ्लैशबैक)
शक्तिनगर के एक पत्रकार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुहार लगाई थी कि राबर्ट्सगंज के विकासनगर में एक ‘बहरूपिया’ सक्रिय है। आरोप था कि लॉरेंस एंथोनी ऑडियो क्लिप्स में मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर पुलिस और प्रशासन को अपनी उंगलियों पर नचाने का दावा करता था। भोले-भाले लोगों के बीच ‘भारी भौकाल’ बनाकर अवैध लाभ लेना और खुद को कानून से ऊपर समझना ही इसका असली ‘प्रोडक्शन’ बन गया था।
जाँच में फुस्स हुआ सारा ‘एक्शन’
जब पुलिस अधीक्षक के आदेश पर क्षेत्राधिकारी नगर ने इस केस की ‘स्क्रिप्ट’ खंगाली, तो कहानी कुछ और ही निकली:
• मानसिक स्थिति:
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, यह तथाकथित प्रोड्यूसर साहब ‘बड़बोलेपन’ के शिकार हैं और मानसिक रूप से अस्वस्थ भी रहते हैं।
• संस्था से बेदखल:
जिस ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ की धौंस ये जमाते थे, उसके चेयरमैन ने साफ़ कह दिया कि इस ‘कलाकार’ को पद से पहले ही गेट आउट (हटाया) किया जा चुका है।
• सिर्फ बातों के शेर:
जाँच में पाया गया कि ये भाई साहब सिर्फ फोन पर अज्ञात लोगों को डराने-धमकाने और भड़काने का काम कर रहे थे।
द क्लाइमेक्स: अब खानी होगी जेल की हवा
पुलिस ने इस फिल्मी ड्रामे का ‘द एंड’ करते हुए आरोपी को धर दबोचा। राबर्ट्सगंज पुलिस ने लॉरेंस एंथोनी के खिलाफ धारा 126/135 बीएनएसएस (BNSS) के तहत चालान काटकर उसे कोर्ट भेज दिया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि जिले में किसी का भी ‘फेक भौकाल’ नहीं चलेगा, चाहे वह खुद को कितना भी बड़ा ‘प्रोड्यूसर’ क्यों न समझता हो।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला










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