काशी की धरा पर विक्रमोत्सव 2026 का आगाज़, न्याय,शौर्य,शुशासन,के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन

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वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक विक्रमोत्सव के अंतर्गत ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का भव्य मंचन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक कलाकार राजा विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य, शासन और सिंहासन बत्तीसी की गाथा जीवंत कर रहे हैं।

विक्रमोत्सव 2026 न्याय,सुशासन, शौर्य के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य का शुभारंभ काशी के पावन धरती पर 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ0 मोहन यादव व सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने बरेका ग्राउंड में किया जो 3 से 5 अप्रैल प्रतिदिन शाय 7 बजे मंचित किया जा रहा है।

 

*महानाट्य मंचन की प्रमुख विशेषताये*

 

विशाल कैनवासः इस नाटक में 200 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जो सम्राट विक्रमादित्य के कालखंड को जीवंत करते हैं.

 

सजीव दृश्यः ऐतिहासिक वातावरण बनाने के लिए मंच पर 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊंट और हाथी का उपयोग किया गया है, जो दर्शकों को प्राचीन उज्जैन के वैभव का अनुभव कराते हैं।

 

भव्य मंचः नाटक के लिए तीन विशाल मंच बनाए गए हैं। मुख्य मंच 80×62 फीट का है, जिसके दोनों ओर 42×42 फीट के दो अन्य मंच हैं।

कथावस्तुः इसमें सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों के माध्यम से सम्राट के न्यायप्रिय और साहसी व्यक्तित्व को दर्शाया गया है।

 

सांस्कृतिक संगमः नाटक के साथ-साथ दर्शकों के लिए मध्य प्रदेश के खान-पान, लोक नृत्य और वहां के प्रमुख देवस्थानों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

नई पीढ़ी को आदर्शों से जोड़ने का अभियान

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह केवल एक महानाट्य का रूपांतरण मात्र नहीं है, बल्कि आज की नई पीढ़ी को अपने मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक वृहद अभियान है. मैं इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का हृदय से अभिनंदन करता हूं और धन्यवाद देता हूं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए बाबा विश्वनाथ की पावन धरा को महाकाल की धरा के साथ इस महानाट्य के माध्यम से सांस्कृतिक एकता के बंधन में जोड़ने का कार्य किया है. काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरा है, जो विश्व के नाथ हैं और उज्जैन महाकाल की पावन नगरी है. याद रखिए, जो काल की अवमानना करता है, उसे महाकाल स्वयं दंडित करते हैं. उज्जैन वह भूमि है, जहां महाकाल साक्षात विराजमान हैं. उनकी कृपा उस हर व्यक्ति पर बरसती है, जो काल की गति को पहचानकर उसके अनुरूप स्वयं को तैयार करता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तीन भाइयों की जोड़ियां जग विख्यात हैं. प्रभु राम-लक्ष्मण, भगवान कृष्ण-बलराम और महाराज भर्तृहरि एवं महाराज विक्रमादित्य. आज काशी इसकी साक्षी है. यह मेरा सौभाग्य है कि महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में ही दीक्षित हुए थे. उन्होंने कहा कि काल गणना की धरती उज्जैन है और पंचांग की धरती बनारस है। इन दोनों का समन्वय भारतीय काल गणना को वैश्विक मंच पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

 

रिपोर्ट जगदीश शुक्ला

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