” गंगा द्वार पर किया प्रकृति को नमन, मां सरस्वती की उतारी आरती “

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” प्रकृति के श्रृंगार, ज्ञान की साधना और नई चेतना के महापर्व पर नमामि गंगे ने दिया मन की नकारात्मकता को त्यागकर नए विचारों और ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश “

शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन पर्व पर नमामि गंगे ने प्रकृति के पुनरुत्थान, ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर प्रकृति और मां सरस्वती की आरती उतारी। प्रकृति के नव-श्रृंगार और मानवीय उल्लास की नव चेतना के अवसर पर प्रकृति के प्रिय विषय नदी, वृक्ष से प्रेम, साफ- सफाई, स्वच्छता, प्रदूषण से मुक्ति आदि से लोगों को जुड़ने का आवाह्न किया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि वसंत पंचमी का संदेश अत्यंत स्पष्ट है—जड़ता को त्यागकर चेतना को अपनाना। जैसे पेड़ों के पुराने पत्ते गिरते हैं

और नए पत्तों का आगमन होता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने मन की नकारात्मकता को त्यागकर नए विचारों और ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ना चाहिए। वीणा की मधुर तान हमें जीवन में सौहार्द और सामंजस्य बिठाने की कला सिखाती है। आइए, इस वसंत पंचमी पर हम अज्ञानता के अंधकार को मिटाने और विद्या के दीप को प्रज्वलित करने का संकल्प लें। आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला , अभिजीत, आदित्य, प्रवीण, अंकित, दिलखुश, रवि यादव, सुशील सिंह , आशीष राज एवं सैकड़ो की संख्या में नागरिक शामिल है ।

 

रिपोर्ट -विजयलक्ष्मी तिवारी

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