वाराणसी। मकर संक्रांति के आगमन से पूर्व ही वाराणसी के बाजारों में त्योहार का रंग चढ़ गया है। लाई, चूड़ा, चना, रेवड़ी, तिल व बादाम पट्टी की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत लोग मकर संक्रांति से पहले अपनी बहन, बुआ और अन्य रिश्तेदारों के यहां लाई-चूड़ा, नया चावल व मिठाइयां भेजते हैं, जिसके चलते बाजारों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है।
पांडेयपुर, लमही, पांडेयपुर चौराहा,भोजूबीर, पहड़िया सहित अन्य प्रमुख बाजारों में सुबह से देर रात तक ग्राहकों की चहल-पहल बनी हुई है। लाई-चूड़ा के थोक व्यवसायी पवन गुप्ता, राजू गुप्ता व संजय गुप्ता ने बताया कि इन वस्तुओं की मांग पूरे वर्ष रहती है, लेकिन मकर संक्रांति के दौरान बिक्री में कई गुना बढ़ोतरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कीमतों में पिछले साल की तुलना में मामूली अंतर ही है, जिससे ग्राहकों को राहत मिली है।
इस बार बाजार में तिल पट्टी, बादाम पट्टी और लाई पट्टी के आकर्षक व नए डिज़ाइन विशेष रूप से ग्राहकों को लुभा रहे हैं। अलग-अलग आकार, स्वाद और पैकिंग में उपलब्ध इन पारंपरिक मिठाइयों की मांग सबसे अधिक देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार वर्तमान दरों में लाई 60 रुपये प्रति किलो, चूड़ा 50 रुपये, चना 100 रुपये, रेवड़ी 80 रुपये, तिल पट्टी 180 रुपये, बादाम पट्टी 120 रुपये, लाई पट्टी 100 रुपये, ढूंढा 90 रुपये, रामदाना 140 रुपये और नया चावल 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि मकर संक्रांति तक खरीदारी का यह सिलसिला जारी रहेगा। रिश्तेदारी में भेंट देने और घर-घर जाकर खाने-खिलाने की परंपरा के कारण हर वर्ष की तरह इस बार भी बाजारों में जबरदस्त भीड़ और उत्साह देखने को मिल रहा है। फिलहाज अभी बेटियों के घर भेजने के लिए ले जाने वालों की भीड़ अधिक है। माना जा रहा है कि अब घरों के लिए भी लोग खरीदारी करने जुटेंगे।









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