पुलवामा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर प्रियंका ने सहकर्मी डॉ. नदीम को 8 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जो मेवात में विस्फोटक खरीदने पहुंचे। मध्यमवर्गीय परिवार की प्रियंका ने एमबीबीएस-एमडी किया, सरकारी नौकरी पाई। पुलवामा में काम करते हुए सेकुलिरजम यानी उदारवादी विचार अपनाए, स्थानीय संबंध मजबूत किए। नदीम की मदद मांग पर बिना संदेह धन भेजा।
जांच में पता चला—फंड आतंक नेटवर्क तक पहुंचा।
प्रियंका पर यूएपीए सहित आतंक फंडिंग की धाराएं लगीं। माता-पिता स्तब्ध है; जीवनभर की कमाई शिक्षा पर लगी, अब जेल का ठप्पा। अब जो सेकुलिरजम का कीड़ा काटता है हिन्दू लड़कियों वो इससे सबक ले सकती है कि तुम्हारी जिंदग्गी किस तरह तबाह हो सकती है लग गया देशद्रोह का ठप्पा अब बताओ ये जीवन किस अर्थ का जिस जीवन पर देश से गद्दारी का ठप्पा लग जाये
यह घटना चेतावनी है: संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी। अंधविश्वास या अति सहिष्णुता खतरे पैदा कर सकती है। सफलता के बावजूद गलत संबंध जीवन बर्बाद कर देते हैं। सुरक्षा व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। जांच जारी, न्याय की प्रतीक्षा में घर वाले रो रहे है कोई मदत को भी नही खड़ा हो रहा है क्योंकि गद्दारो का मदत करना सनातन धर्म के नियमो के खिलाफ है।








Users Today : 88
Users This Year : 24168
Total Users : 36761
Views Today : 209
Total views : 72292