राजधानी लखनऊ की सड़कों पर नीले झंडे, पोस्टर और बैनर दिख रहे हैं। कांशीराम स्मारक स्थल पर मंच सज चुका है। कुर्सियां लग चुकी हैं। जिलावार और विधानसभावार कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी बांटी जा चुकी है। रमाबाई अंबेडकर स्थल पर पार्टी के कार्यकर्ताओं के ठहरने का इंतजाम है। जुटान शुरू हो चुकी है।
चार साल पहले यानी 2021 बसपा प्रमुख मायावती ने 9 अक्तूबर को ही कांशीराम स्मारक स्थल में रैली की थी। तब कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने थे। 2022 के चुनाव में बसपा महज़ एक सीट पर ही जीत सकी थी। इस बार भी उन्होंने रैली के लिए वही तारीख और वही स्थान चुना है। बसपा गुरुवार को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाकर वर्ष 2027 में खुद को मजबूत विकल्प के रूप में जनता के सामने रखेगी।
खिसकती राजनीतिक जमीन जुटाने की जद्दोजहद में जुटी बसपा में मायावती गुरुवार को नई जान फूंकने की कोशिश करेंगी। 2024 के लोकसभा चुनावों में छिटक गए वोटरों को एक बार फिर पार्टी से जोड़ कर उसकी ताकत बढ़ाने की कवायद में जुटेंगी। बामसेफ और बीएस-4 को जिम्मेदारी दी गई है। तकरीबन पांच लाख लोगों के जुटान का दावा बसपा की तरफ से किया गया है। 2027 का चुनाव बसपा के लिए ‘करो या मरो’ सरीखा है। यही वजह है कि बसपा इसमें कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है।










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