मथुरा
मथुरा जनपद के वृंदावन में धर्मनगरी में प्लॉट खरीद-बिक्री के नाम पर 70 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर थाना वृंदावन पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
पुलिस को दी गई तहरीर में शिकायतकर्ता रवि सिंह निवासी राधानिवास, वृंदावन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में आरोपियों ने उन्हें वृंदावन क्षेत्र में 250 वर्ग मीटर (करीब 300 वर्ग गज) का एक प्लॉट दिखाया। आरोप है कि उक्त जमीन को वैध बताते हुए उसके कागजात भी दिखाए गए और जल्द बैनामा कराने का भरोसा दिया गया। भरोसा दिलाने के बाद किस्तों में बड़ी धनराशि ली गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने सौदा पक्का कराने के नाम पर कई बार रकम ली। बताया गया है कि एक अक्टूबर 2024 को करीब छह लाख रुपये बैंक खाते में जमा कराए गए। इसके बाद 21 अक्टूबर 2024 को रजिस्ट्री कार्यालय मथुरा में बैनामा कराने की बात कहकर बुलाया गया, जहां चार लाख रुपये का चेक तथा 60 लाख रुपये नकद लिए जाने का आरोप है। बाद में 25 अक्टूबर को भी चार लाख रुपये दिए जाने की बात कही गई है। इस प्रकार कुल 70 लाख रुपये लिए जाने का दावा किया गया है।
पीड़ित का आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने बैनामा कराने में लगातार टालमटोल शुरू कर दी। कभी मूल कागजात किसी अन्य व्यक्ति के पास होने की बात कही गई तो कभी कुछ समय बाद सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। जब काफी समय बीतने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं हुई तो पीड़ित को संदेह हुआ।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत हुए। शिकायतकर्ता ने जब जमीन के संबंध में स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाई तो उसे धोखाधड़ी का संदेह हुआ। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई। अधिकारियों के निर्देश पर थाना वृंदावन पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में भृगेश शर्मा निवासी कैलाश नगर, महेश कुमार निवासी विधौनी, थाना सुरीर तथा अमित कुमार निवासी विधौनी, थाना सुरीर को नामजद किया गया है। तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अरुण कुमार डागर को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जा रही है। दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद शहर में प्लॉट खरीद-बिक्री के मामलों को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी संपत्ति का सौदा करने से पहले राजस्व अभिलेख, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और विधिक स्थिति की पूरी जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में विवाद और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।









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