सिकन्दरपु केंद्र संचालक की मनमानी से किसान परेशान किसानों ने खाद की शिकायत पर जागा कृषि विभाग, सिकंदरपुर समिति के सचीव को कडी फटकार

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चकिया, चंदौली

खरीफ सीजन के बीच खाद के लिए परेशान किसानों की आवाज आखिरकार कृषि विभाग तक पहुंच गई किसान नेता विरेन्द्र पाल व अन्य किसानों ने जिला कृषि अधिकारी, चंदौली के कार्यालय में किसानों की समस्याओं को लेकर हुई बैठक में खाद वितरण में लापरवाही का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

बैठक के दौरान जिला कृषि अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और समिति सचिवों से जवाब-तलब करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों को किसी भी हाल में खाद के लिए भटकना नहीं पड़े।

जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान सिकंदरपुर समिति के सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन पहले स्विच ऑफ मिला। बाद में संपर्क होने पर सचिव ने स्वयं स्वीकार किया कि समिति पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है।

इस पर जिला कृषि अधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा कि जब पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तो किसानों को खाद क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने तत्काल निर्देश जारी करते हुए कहा कि बुधवार से सिकंदरपुर समिति पर खाद वितरण हर हाल में शुरू कराया जाए।

बैठक में यह भी बताया गया कि रामपुर कला, सहदुल्लापुर, शिकारगंज समिति तथा क्रय-विक्रय केंद्रों पर भी पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। ऐसे में यदि किसी किसान को खाद नहीं मिल रही है तो यह वितरण व्यवस्था की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि खेतों में बुवाई और फसल की देखभाल का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। ऐसे में किसानों को खाद के लिए घंटों लाइन लगाने और बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जबकि विभाग पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है। उन्होंने मांग की कि दोषी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर किसानों को बिना भेदभाव और बिना देरी के खाद उपलब्ध कराई जाए।

आज पर रहेगी किसानों की नजर

अब पूरे क्षेत्र के किसानों की निगाहें सिकंदरपुर समिति पर टिकी हैं। यदि विभागीय निर्देशों के बाद भी बुधवार को खाद वितरण शुरू नहीं होता है, तो किसानों ने इसकी सूचना तत्काल देने की अपील की है, ताकि मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाकर आवश्यक कार्रवाई कराई जा सके।

खेतों तक समय पर खाद पहुंचाना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और फसल बचाने का सवाल भी है। अब देखना होगा कि विभाग के निर्देश धरातल पर कितना असर दिखाते हैं।

 

रिपोर्ट – आलिम हाशमी

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