चंदौली धानापुर। क्षेत्र के सरयां गांव में तीन दिनों तक किसानों का आक्रोश बिजली विभाग के खिलाफ सड़कों पर गूंजता रहा। “बिजली दो, वरना रोड जाम!” जैसे नारों ने पूरे गांव में संघर्ष की आग जला दी। अंधेरी रातें, सूखे खेत और टॉर्च की मद्धम रोशनी में पढ़ते बच्चे—यह सब गांव के लोगों के लिए रोजमर्रा की पीड़ा बन चुका था। लेकिन किसानों की एकजुटता ने आखिरकार इस अंधेरे को हरा दिया। अब किसान पिता पिंटू पाल गर्व से कहते हैं, “अब बेटा टॉर्च की नहीं, बल्ब की रोशनी में पढ़ेगा।”
यह सिर्फ एक ट्रांसफॉर्मर की कहानी नहीं, बल्कि हक के लिए लड़ी गई एक सामूहिक लड़ाई की मिसाल है। सरयां गांव के किसानों को जब विभागीय आश्वासनों से राहत नहीं मिली, तो उन्होंने शांत रहने के बजाय सड़क पर उतरकर अपनी आवाज़ बुलंद की। तीन दिन तक चले धरने ने प्रशासन और बिजली विभाग को आखिरकार समाधान देने पर मजबूर कर दिया।
16 दिन का अंधकार, फिर किसानों का संघर्ष
करीब 16 दिन पहले गांव का पुराना ट्रांसफॉर्मर खराब हो गया था। इसके बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। नलकूप बंद हो गए, खेतों तक पानी नहीं पहुंचा और फसलें सूखने लगीं। ग्रामीणों की मुश्किलें यहीं नहीं रुकीं—बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, घरों में दूध तक फटने लगा और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
किसान नेता पिंटू पाल, शेषनाथ यादव, दीनानाथ श्रीवास्तव समेत कई नेताओं और ग्रामीण लगातार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करते रहे। बार-बार शिकायत की गई, लेकिन समाधान की जगह केवल आश्वासन मिले।










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