अवैध अस्पतालों पर मेहरबानी या मजबूरी? स्वास्थ्य विभाग की ‘कागजी’ कार्रवाई पर उठे सवाल

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सोनभद्र

जनपद में अवैध क्लीनिकों और पैथोलॉजी सेंटरों का जाल बिछा हुआ है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमान खान द्वारा आईजीआरएस (IGRS) के माध्यम से की गई शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

मुख्य मामले जिन पर विभाग घिरा:

मॉडर्न पैथोलॉजी (कचनरवा): छापेमारी के दौरान संचालक ताला लगाकर फरार हो गया, लेकिन विभाग ने इसे सील करने के बजाय दोबारा ‘मुहूर्त’ देखकर निरीक्षण करने की बात कहकर टाल दिया।

सौम्या हॉस्पिटल (उर्मोरा): बिना वैध पंजीकरण के संचालित इस अस्पताल को विभाग ने यह कहकर क्लीनचिट दे दी कि “नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया है।” सवाल यह है कि आवेदन क्या अवैध काम का लाइसेंस है?

रामा हॉस्पिटल: लापरवाही के कारण सील होने के बावजूद गतिविधियों की शिकायत है। विभाग कोर्ट केस का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।

सुनील मौर्या क्लीनिक: विभाग का दावा है कि उन्हें क्लीनिक का ‘पता’ ही नहीं मिल रहा है, जबकि स्थानीय जनता के बीच यह केंद्र चर्चा का विषय है।

“विभाग अवैध केंद्रों को सील करने के बजाय केवल समय काटने वाली आख्याएं लगा रहा है। यदि तत्काल एफआईआर और तालाबंदी नहीं हुई, तो शासन स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।” > — अमान खान, जिलाध्यक्ष, आरटीआई एसोसिएशन
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इन ‘मौत के अड्डों’ पर नकेल कसते हैं या शिकायतों का पुलिंदा फाइलों में ही दबा रह जाता है।

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

 

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