उत्तर प्रदेश सरकार ‘एआई प्रज्ञा’ प्रोग्राम और स्टार्टअप नीति के जरिए लगभग 10 लाख युवाओं को एआई व डिजिटल तकनीक में प्रशिक्षित करने की तैयारी कर रही है। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के सहयोग से स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। आईटीआई में एआई लैब और स्टार्टअप इन्क्यूबेटर बनाकर रोजगार व उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रदेश में स्टार्टअप नीति और एआई प्रज्ञा प्रोग्राम के माध्यम से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की तैयारी है। इसके तहत एआई और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में लगभग 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है
स्टार्टअप नीति, एआई स्किलिंग और तकनीकी निवेश के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में स्टार्टअप गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे एमएसएमई क्षेत्र को भी नई दिशा मिल रही है और युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की लगभग 400 यूनिट्स सक्रिय हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन इन्क्यूबेटरों के माध्यम से युवाओं को नवाचार और तकनीकी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से युवाओं को आधुनिक डिजिटल स्किल्स और एआई तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रदेश एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिल रही है। युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं।
इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों को एआई, डेटा एनालिटिक्स और उन्नत डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।









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