क्रिसमस डे कार्यक्रम स्वैच्छिक हों, बच्चों पर न बने दबाव : अभिभावक

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चन्दौली

25 दिसंबर को मनाए जाने वाले क्रिसमस डे को लेकर जिले के कई प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों में असंतोष देखने को मिल रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि कुछ निजी स्कूल बच्चों व उनके माता-पिता की पूर्व अनुमति के बिना ही बच्चों को सेंटा क्लॉज की वेशभूषा पहनाने अथवा उस भूमिका में प्रस्तुति देने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।

अभिभावकों का कहना है कि प्रत्येक परिवार की अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्थाएं होती हैं, जिनका सम्मान किया जाना आवश्यक है। बच्चों पर किसी विशेष कार्यक्रम में भाग लेने का दबाव डालना न केवल गलत है, बल्कि उनकी भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है।

इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से मांग की है कि किसी भी बच्चे को बिना अभिभावकीय सहमति के सेंटा क्लॉज न बनाया जाए। साथ ही शिक्षा विभाग से भी हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि निजी स्कूलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें और भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

राष्ट्रीय परशुराम सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बम-बम दूबे सहित मनीष तिवारी, ओमप्रकाश तिवारी, कृष्णकांत तिवारी, मोनू पाण्डेय, अरूण दूबे, अतुल पाण्डेय, सत्यप्रकाश पाण्डेय समेत अन्य अभिभावकों ने कहा कि क्रिसमस डे से जुड़े सभी कार्यक्रम पूर्णतः स्वैच्छिक होने चाहिए। बच्चों की भागीदारी उनकी एवं उनके माता-पिता की इच्छा पर ही निर्भर होनी चाहिए।

अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं की रक्षा सुनिश्चित की जाए।



रिपोर्ट- अलीम हाशमी

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