किसानों ने आतंक मचा रहे बंदरो को डीएम कार्यालय में छोड़ा

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चंदौली सकलडीहा 

कई गांवों में बन्दरों का आतंक है। बन्दर जान माल को हानि पहुंचा रहे है। प्रशासन की पुख्ता नीति नही होने कारण जिले के ग्रामीण जान माल से हाथ धो रहे है। ढुलमुल नीति के चलते किसानों ने बन्दरों को पकड़कर जिला कार्यालय में जिलाधिकारी के कमरे के ठीक सामने किसानों ने बन्द बोरे में,बंदरों के डिस्पोजल के लिए रखा।भारतीय किसान यूनियन टिकैत के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने खुद इस कार्य को अंजाम दिया। मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदीने कहा कि जिले के कई गाव धरहरा उकनी सलेमपुर सकलडीहा फत्ते प्रतापपुर काँटा विशुनपुरा आदि आदि दर्जनों गांवों में बंदरों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।

बच्चों महिलाओ और चलते हुवे राहगीरों पर हमला कर रहे है। खड़ी सब्जी पेड़ में लगे फल अनाज को नुकसान कर रहे है। इन गांवों में किसानों ने सब्जी लगाना ही छोड़ दिया है। अमरूद आम पपीते अनार आदि आदि को पनपते ही बन्दर चट कर जा रहे है। लोग बंदरो से त्रस्त है।शासन प्रशासन कान में तेल डालकर कुम्भकर्ण की नींद सो रहा है। ऐसा नही है कि शासन प्रशासन को ग्रमीणों की जलालत भरी जिंदगी के बारे में पता नहीं है। कई किसान दिवस में इस मुद्दे को उठाया गया। जिलाधिकारी ने भी खुद इस समस्या को निवारण के लिए आस्वासन दिया था। जब जिला बन अधिकारी से बात करो तो वे जिला पंचायत राज अधिकारी पर फेंक देते है।

किसान जिलाधिकारी जिला बन अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी एडीएम जिला सूचना अधिकारी के इर्द गिर्द पेंडुलम की तरह घूम रहा है। ग्राम धरहरा में ग्रामीणों के सहयोग से बन्दर पकड़ा जा रहा है। बन्दर कहा जायेगा कौन ले जाएगा इसके बाबत बीते दिनों जिलाधिकारी से बात हुई तो महोदय ने गाव के ग्रामीणों को पूरा आस्वासन दिया कि किसान बन्दर पकड़वाए ले जाने का साधन और कौन ले जाएगा इसका प्रबन्ध प्रशासन करेगा ।

इस बाबत एडीएम जिला सूचना अधिकारी जिला बन अशिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी को लिखित सूचना के साथ मोबाइल पर संवाद के माध्यम से सूचना दे दी गयी थी। लेकिन 24 घण्टे बीत जाने पर जब कोई सार्थक परिणाम नही निकला तो किसान स्वयम बन्दर को बोरे में लेकर जिलाधिकारी के कमरे के दरवाजे पर छोड़ा आये। अब जिलाधिका की जिम्मेदारी बनती है कि बन्दर कैसे डिस्पोजल किया जाएगा। वैसे ही किसानो की फसल अतिव्रिष्टि से खराब हो गयी है,उसपर से आवारा पशु और बन्दर का हमला। क्या करे किसान। कौन सुनने वाला है।

जन प्रतिनिधि सिर्फ शासन को लेटर लिख रहे है,जमीन पर किसानों को कोई फायदा नही मिल रहा।अगर बन्दर ले जाने की ब्यवस्था प्रशासन नही करता है तो शाम को पिंजरे में पचासों बन्दर जिलाधिकारी कार्यालय पर रखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो संगठन धरने पर भी बैठने का काम करेगा। भाकियू टिकैत ने व्हिप जारी कर जिले के सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अलर्ट मोड़ पर रहने के लिए कहा गया है।

जिले में बन्दर डिस्पोजल की सारी कार्यवाही अब जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान के नेतृत्व में होगी।ऐसा जिलाकार्यकारिणी ने निर्णय लिया है। संगठन किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

 

 

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

 

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