वाराणसी में फर्जी नियुक्ति पत्र के बड़े रैकेट का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार, नामचीन कंपनियों के फर्जी पत्र बनाकर करते थे धोखाधड़ी, कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

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वाराणसी-     उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले बड़े साइबर गिरोह का वाराणसी पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन, एडीसीपी मुख्यालय एवं अपराध के पर्यवेक्षण तथा एडीसीपी वरुणा जोन नीतू कादियान के नेतृत्व में थाना सारनाथ पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी टेक्सटाइल कंपनी “RRMV” के 11 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से 22 फर्जी डिजिटल नियुक्ति पत्र, 19 रूम मैनेजमेंट फॉर्म और 10 मोबाइल फोन बरामद किए गए।

एडीसीपी नीतू कादियान ने बताया कि आरोपितों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों के बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की। यह लोग खुद को नामचीन “TEXTILE INDUSTRY” और “GARMENT TEXTILE INDUSTRY PRIVATE LIMITED” कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे और फर्जी वेबसाइट (https://zeriatex.com) के जरिए जॉब ऑफर भेजते थे। बाद में युवाओं से कपड़ा बिक्री प्रशिक्षण और रूम रेंट के नाम पर पैसे वसूलते थे।

कैसे हुआ खुलासा!
26 अक्टूबर को मऊ निवासी अमरेश यादव ने थाना सारनाथ में तहरीर दी कि “RRMV कंपनी” के लोगों ने नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10,000 नकद और ₹2850 रूम रेंट के नाम पर वसूले तथा फर्जी नियुक्ति पत्र दिया। शिकायत के बाद थाना सारनाथ और साइबर सेल की टीम ने संयुक्त छापेमारी की। टीम जब RRMV कंपनी के शाखा कार्यालय, कृष्णानगर कॉलोनी, पहड़िया (आशीर्वाद हॉस्पिटल के पास) पहुंची, तो वहां लगभग 50 युवक-युवतियां प्रशिक्षण ले रहे थे। पूछताछ में सभी ने बताया कि उन्हें नौकरी के नाम पर पैसे लेकर यहां बुलाया गया था।

गिरफ्तार अभियुक्त!
पुलिस ने मौके से कंपनी के प्रबंधक और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम हैं अमन वर्मा (सुल्तानपुर), अनुराग (प्रयागराज), प्रदीप कुमार (प्रयागराज), अनीस तिवारी (बिहार), आलोक श्रीवास्तव (मुंबई, ठाणे), राजू शुक्ला (भदोही), विकास कुमार (वैशाली), सुहेल शेख (धनबाद, झारखंड), मोहम्मद अय्यूब (प्रतापगढ़), आकाश चंद (गोरखपुर), रवि प्रकाश (कैमूर, बिहार), सभी को 27 अक्टूबर 2025 सुबह 9 बजे थाना सारनाथ से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि कंपनी के CMD रवि प्रकाश और उसके साथी रविंद्र ने मिलकर यह नेटवर्क तैयार किया था।

गिरोह के काम करने का तरीका!
एडीसीपी नीतू कादियान के अनुसार, आरोपित लोग “RRMV कम्पनी” के नाम पर सोशल मीडिया और जॉब पोर्टल्स पर विज्ञापन डालते थे। इच्छुक युवाओं को इंटरव्यू के नाम पर वाराणसी बुलाया जाता था, जहां उनसे विभिन्न मदों में राशि वसूली जाती थी। बाद में उन्हें बताया जाता था कि उन्हें “कपड़े बेचने” का काम करना होगा और अपनी अंडर चेन बनानी होगी, यानी यह एक तरह का नेटवर्क मार्केटिंग आधारित साइबर फ्रॉड था।

पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि कंपनी को रजिस्टर्ड दिखाने के लिए उन्होंने RRMV REGULAR WEAR (CIN: U14101UP2023PTC180395, GST: 09AAMCR6064JIZS) का इस्तेमाल किया। मुनाफा न होने पर उन्होंने अलग-अलग मोबाइल ऐप्स से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर वाट्सएप के जरिए भेजने का काम शुरू किया।रेस्क्यू और बरामदगी छापेमारी के दौरान 24 युवक और 14 युवतियां (कुल 38 पीड़ित) रेस्क्यू किए गए। मौके से बरामद दस्तावेज़ों में 22 फर्जी नियुक्ति पत्र और 19 रूम मैनेजमेंट फॉर्म मिले जिनमें युवाओं के बायोडाटा, आधार कार्ड और अंकपत्र की प्रतियां थीं।

 

 

पुलिस टीम!
इस कार्रवाई में थानाध्यक्ष शिवानंद सिसोदिया, चौकी प्रभारी अनिल कुमार, उपनिरीक्षक मीनू सिंह, रामअजोर, विजेता कुमारी, राहुल यादव, हेड कांस्टेबल विनीत कुमार सिंह, पंकज कुमार सिंह, कांस्टेबल विनय कुमार, सौरभ तिवारी, आदर्श, अंकित, रोहित तिवारी, महिला कांस्टेबल अनुराधा तिवारी, निरीक्षक मनोज कुमार तिवारी, उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार जायसवाल व हिमांशु शुक्ला समेत साइबर टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे।एडीसीपी वरुणा जोन नीतू कादियान ने कहाए “यह कार्रवाई साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर सख्त नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता है।

 

बेरोजगार युवाओं को लुभावने जॉब ऑफर से ठगने वाले ऐसे गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। आम नागरिकों से अपील है कि किसी भी अपरिचित कंपनी द्वारा ऑनलाइन नौकरी के नाम पर मांगी गई राशि या दस्तावेज साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।”पुलिस ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ धारा 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2) BNS व बढ़ोत्तरी धारा 3(5) BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

 

रिपोर्ट- विजयलक्ष्मी तिवारी

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