इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा मामले में न्यायिक लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए वाराणसी के संबंधित मजिस्ट्रेट एवं पुनरीक्षण न्यायालय से स्पष्टीकरण मांगा है।
कोर्ट ने कहा यह चिंतनीय है कि सुप्रीम कोर्ट और इस न्यायालय के निर्देशों के बावजूद न तो ट्रायल कोर्ट और न ही पुनरीक्षण न्यायालय ने पति को परिसंपत्तियों और देनदारियों का हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस तरह की निष्क्रियता सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के बाध्यकारी दृष्टांतों की अवहेलना और अवमानना के समान है, जो संबंधित कोर्ट द्वारा उदासीनता की स्थिति को दर्शाती है।
साथ ही इस कोर्ट द्वारा पति के वेतन से भरण-पोषण की वसूली अनिवार्य करने वाले निर्देश का भी अनुपालन नहीं किया गया है। ऐसा आचरण न्यायिक प्रणाली में वादकारियों के विश्वास को क्षीण करता है।
इस कोर्ट ने कई अवसरों पर परिवार न्यायालयों को संवेदनशीलता, जागरूकता और ज़िम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।










Users Today : 18
Users This Year : 11878
Total Users : 24471
Views Today : 68
Total views : 48142