“खून से सने ‘राजा’ की रिहाई पर ब्रेक! नरभक्षी कोलंदर अभी भी सलाखों में कैद”

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उन्नाव जेल की ऊँची दीवारों के पीछे 14 हत्याओं का खूनी गुनहगार राजा कोलंदर अभी भी बंद है। इंसानी खोपड़ी से सूप पीने वाले इस सीरियल किलर की रिहाई को राज्यपाल की मंजूरी जरूर मिली, लेकिन कानून की एक और सख्त दीवार ने उसे बाहर आने से रोक दिया।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की मंजूरी के बाद शासन ने 4 सितंबर को राजा कोलंदर की सशर्त रिहाई का आदेश तो जारी किया, लेकिन उन्नाव जेल प्रशासन ने साफ कर दिया “राजा कोलंदर दो मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है, ऐसे में सिर्फ एक केस में मिली रिहाई पर वह जेल से बाहर नहीं जा सकता।”

 कानून की जंजीरें, जुर्म का भार भारी

राजा कोलंदर को प्रयागराज में पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। इसके बाद लखनऊ में एक और डबल मर्डर और अपहरण के केस में भी उसे आजीवन कारावास दिया गया।

उन्नाव जेल के वरिष्ठ अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने कहा, “कोलंदर को दो मामलों में उम्रकैद की सजा मिली है। एक केस में सशर्त रिहाई के आदेश मिले हैं, लेकिन दूसरा केस रुकावट बना हुआ है। इसलिए रिहाई अभी संभव नहीं है।”

जिसने इंसानियत को रौंदा, क्या वो रिहाई का हकदार है?

धीरेंद्र सिंह के बेटे संदीप का कहना है “कोलंदर सिर्फ मेरे पिता का हत्यारा नहीं, कई निर्दोषों की जिंदगी छीनने वाला दरिंदा है। उसे रिहा करना नहीं, फांसी देनी चाहिए।”

संदीप की बात से ही नहीं, पूरे पत्रकार समाज और पीड़ित परिवारों में इस खबर को लेकर उबाल है।

धीरेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2000 में हत्या के बाद राजा कोलंदर के फार्म हाउस से मानव खोपड़ियाँ और कंकाल बरामद हुए थे।

 ‘अदालत’, ‘जमानत’, ‘आंदोलन’: उसके बच्चों के नाम और सोच

कोलंदर की मानसिकता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अपने बेटों के नाम ‘अदालत’ और ‘जमानत’, और बेटी का नाम ‘आंदोलन’ रखा था। पत्नी का नाम ‘फूलन देवी’ रखा और वह जिला पंचायत सदस्य भी बन गई थी।

वह खुद को राजा समझता था और कहता था “जो मुझे पसंद नहीं, मैं उसे अपनी अदालत में सजा देता हूं।”

 25 साल जेल में, लेकिन अब भी ‘रिहाई’ दूर

राजा कोलंदर ने अब तक 23 साल, 10 महीने, 27 दिन की अपरिहार्य और 27 साल, 3 महीने, 3 दिन की सपरिहार्य सजा पूरी कर ली है। उसकी रिहाई 9 शर्तों के साथ तय की गई थी, लेकिन दूसरा केस उसकी राह में दीवार बन गया है।

नरसंहार का ‘राजा’ अब भी जेल में, लेकिन सवाल यही— क्या इंसाफ अब भी जिंदा है?

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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