लखनऊ/उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश पुलिस ने विवेचनाओं की निगरानी को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए NCL (New Criminal Law Monitoring System) पोर्टल लागू कर दिया है। अब किसी भी केस की जांच की पूरी प्रगति सिर्फ एक क्लिक में देखी जा सकेगी। अधिकारियों को विवेचक (IO) से फोन पर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर प्रदेशभर में नई व्यवस्था लागू कर इसकी समीक्षा शुरू हो गई है। आगरा कमिश्नरेट में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने एसीपी और थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर पोर्टल की कार्यप्रणाली समझाई और लंबित विवेचनाओं की समीक्षा की।
नई व्यवस्था के तहत गंभीर अपराधों की विवेचना 90 दिन और सामान्य मामलों की 60 दिन के भीतर पूरी करनी होगी। समय सीमा पार होने पर मामला स्वतः डिफॉल्टर श्रेणी में दर्ज हो जाएगा।
अब हर विवेचक को घटनास्थल का वीडियो, वादी और गवाहों के बयान समेत सभी ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यदि वीडियो की गुणवत्ता खराब हुई या आवश्यक रिकॉर्ड अपलोड नहीं किए गए तो संबंधित अधिकारी को ऑनलाइन नोटिस जारी किया जाएगा।
सबसे अहम बात यह है कि अब जिलों और थानों की रैंकिंग भी इसी NCL पोर्टल के प्रदर्शन के आधार पर होगी। खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों पर कार्रवाई भी संभव है।
इस डिजिटल व्यवस्था से पीड़ितों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। यदि कोई शिकायत करता है कि उसका बयान दर्ज नहीं किया गया या उसमें बदलाव किया गया है, तो पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जांच प्रक्रिया का सत्यापन किया जा सकेगा। इससे विवेचना में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को और मजबूती मिलेगी।











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