चन्दौली धानापुर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा मुख्य रूप से इसलिए निकाली जाती है ताकि जगत के पालनहार अपने गर्भगृह से बाहर आकर सभी भक्तों, विशेषकर जो मंदिर नहीं जा पाते,उनको अपने दर्शन दे सकें।

इस दौरान भगवान अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं。
रथयात्रा से जुड़ी मुख्य बातें और मान्यताएं:
मौसी का घर: मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा सात दिनों के लिए अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं。दर्शन का अवसर: यह यात्रा इस बात का प्रतीक है कि भगवान स्वयं चलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं ताकि हर कोई उनके दर्शन का लाभ उठा सके रस्सी खींचने का महत्व: मान्यता है कि रथ की रस्सी खींचने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती,तिथि: यह ऐतिहासिक आयोजन हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी, ओडिशा में भीं बहुत धूमधाम से मनाया जाता है,
इस रथयात्रा मे मुख्य रूप से मंदिर समिति के शशिकांत रस्तोगी, मनोज दुबे, मुकुंद रस्तोगी,रामजी (ग्राम प्रधान ), बबलू रस्तोगी(सुशील),रमेश द्विवेदी(भाजपा मण्डल अध्यक्ष ), प्रभु रस्तोगी,बिपिन रस्तोगी, जयचंद बरनवाल, राधेकांत, अशोक, सत्यम रंजन वर्मा, बाला जी, अनिल यादव कृष्णा, आशुतोष सिंह मिंटू,सुनील पाण्डेय, संतोष साथ ही वेद विद्यालय के बटुक के साथ ही स्थानीय जनमानस शामिल रहें,,










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