2000 करोड़ क्या, 20,000 करोड़ की गड़बड़ी की खबर भी मेरी रामभक्ति को डिगा नहीं सकती।
मेरी आस्था किसी खाते की एंट्री से नहीं बनी है, वह करोड़ों हिंदुओं की सदियों की तपस्या, संघर्ष और बलिदान से बनी है।
आज मंदिर की कथित चोरी से ज्यादा बेचैनी उन लोगों को हो रही है जिनका राम से, राम मंदिर से और सनातन से कभी कोई संबंध ही नहीं रहा। जिन्हें राम मंदिर बनने पर दर्द हुआ, वे आज अचानक पारदर्शिता के सबसे बड़े ठेकेदार बन बैठे हैं।
जिन्होंने दशकों तक देश के संसाधनों को लूटा, घोटालों की लंबी फेहरिस्त छोड़ी, भ्रष्टाचार को व्यवस्था का हिस्सा बनाया, वे आज राम मंदिर के चढ़ावे पर मगरमच्छ के आँसू बहा रहे हैं। यह चिंता कम और राजनीति ज्यादा लगती है।
राम जन्मभूमि केवल एक मंदिर नहीं, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। कुछ आरोप, कुछ सुर्खियाँ और कुछ राजनीतिक बयान उस आस्था को हिला नहीं सकते।
यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषी को कठोर दंड मिलना चाहिए। लेकिन जाँच से पहले ही पूरे मंदिर आंदोलन, पूरे ट्रस्ट और करोड़ों श्रद्धालुओं को कटघरे में खड़ा करना दुर्भावना को दर्शाता है।
जो लोग वर्षों तक राम मंदिर के विरोध में खड़े रहे, जिन्होंने रामभक्तों की भावनाओं का उपहास किया, वे आज राम मंदिर के सबसे बड़े शुभचिंतक बनने का नाटक कर रहे हैं। देश सब देख रहा है।
राम मेरी आस्था हैं, मेरी पहचान हैं।
यह आस्था किसी राजनीतिक नैरेटिव, किसी टीवी डिबेट या किसी वायरल पोस्ट से टूटने वाली नहीं है।
जाँच हो, सत्य सामने आए, दोषी बख्शे न जाएँ — लेकिन राम और रामभक्तों को बदनाम करने की राजनीति भी सफल नहीं होगी।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला











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