क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास रत
कहा जाता है Prevention is better than Cure ( उपचार सेअच्छा रोकथाम ). हमारी परंपरागत पुलिस हमेशा उपचार के लिए काम करती रहीं हैं। लेकिन हमारे पुलिस आयुक्त महोदय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि पुलिस अपराधों के रोकथाम के लिए काम करे।एक ऐसा प्रकरण उभर कर आया जिसमें पुलिस ने अपराध के रोकथाम की कोशिश की चितईपुर थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में बैंक ऑफ बड़ौदा को चेक कर रहे थे।
अचानक उनको एक वयोवृद्ध महिला दिखी उन्होंने उस वयोवृद्ध महिला से संवाद किया इनका उद्देश्य उसकी मदद करना था। बातचीत में पता चला कि उस महिला के परिजन Royal हॉस्पिटल में हैँ।और यह वयोवृद्ध महिला बैंक से पैसा निकालने गई थी उस वयोवृद्ध महिला के पास 40,000/- थे. यह सच्चाई जान कर SHO चितईपुर स्तब्ध हो गए.
इंस्पेक्टर राकेश गौतम ने तत्काल उस महिला को अपनी जीप में Royal हॉस्पिटल तक उसके परिजनों के पास छोड़ा. वो वयोवृद्ध महिला लाचार थी, रास्ते में उसके साथ लूट हो सकती थी. कोई भी उसका पैसा छीन सकता था. अपने क्षेत्र में अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस की पारखी नजर होनी चाहिए. उसके अंदर सम्वेदनशीलता और और क्षेत्र में उसकी सक्रियता होनी चाहिए.
क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर उसकी नजर होनी चाहिए. चितईपुर थाना ने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है. हमारे पुलिस आयुक्त महोदय लगातार यह निर्देश दे रहे हैं कि पुलिस अपराधों के रोकथाम के लिए प्रयास तेज करे. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी अपराध को घटित होने से रोका जा सकता है. जैसे उपरोक्त मामले में इस वयोवृद्ध महिला के साथ लूट हो सकती थी.
क्या हमारी पुलिस ऐसा करने में सक्षम हो पाएगी? क्या घटित होने वाले अपराधों को रोका जा सकता है? अगर ऐसा सम्भव हुआ तो यह पुलिस की बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी. क्या ऐसा करने के लिए पुलिस को और अधिक दक्षता की जरुरत है? मेरा मानना है कि एक थाना प्रभारी की कुशाग्र बुद्धि, उनका अनुभव, सम्वेदना, समर्पण और कर्तव्य के प्रति उनका जुनून इसे सम्भव बना सकता है।










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