देश के लिये अपूरणीय छती,
“प्रारंभिक जीवन और शिक्षा”
पंडित छन्नुलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक गाँव में हुआ था।
उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर बनारस में संगीत की विधिवत शिक्षा ली।
वहाँ उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खाँ से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की।
“योगदान और कला”
मिश्रा जी बनारस घराने की गायकी, विशेषकर ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे।
उनकी प्रस्तुतियाँ भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई।
वे पूरब अंग की ठुमरी के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं और अनेक संगीत एल्बम जारी कर चुके थे।
वे आकाशवाणी (AIR) और दूरदर्शन के शीर्ष ग्रेड कलाकार रहे।
“पुरस्कार और सम्मान”
पंडित छन्नुलाल मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया।
वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी अलंकृत किए गए थे।
“अन्य महत्वपूर्ण तथ्य”
पंडित जी के परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद की खबरें भी समय-समय पर चर्चा में रही थीं।
विवादों के बाद उन्होंने बनारस छोड़ दिया और अपनी बेटी नम्रता के साथ मिर्ज़ापुर में रहने लगे थे।










Users Today : 3
Users This Year : 6341
Total Users : 18934
Views Today : 3
Total views : 37415