उत्तर प्रदेश में जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कानून व्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं। वहीं चंदौली जनपद के इलियां थाना क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ग्राम ओलीपुर निवासी मंगल मौर्य और उनका परिवार आज भय और दहशत के साये में जीने को मजबूर है। आरोप है। कि 28 अप्रैल की रात लगभग 12:30 बजे घात लगाकर बैठे बदमाशों ने मंगल मौर्य पर जानलेवा फायरिंग की। लेकिन गनीमत रही कि पानी लेने के लिए झुकने के कारण गोली उन्हें नहीं लगी और उनकी जान बाल-बाल बच गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है। कि घटना के बाद उन्होंने तत्काल इलियां थाना पुलिस को लिखित तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने न तो घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच कराई, न ही मुकदमा दर्ज किया। उल्टा पूरा मामला दबाने की कोशिश शुरू कर दी गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि आखिर क्यों।
क्या अपराधियों को बचाने का दबाव है।
या फिर कानून को ताक पर रखकर गरीब की आवाज को कुचलने का खेल चल रहा है।
पीड़ित परिवार का आरोप है। कि जांच के नाम पर पहुंचे विवेचक ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय परिवार को ही डराने-धमकाने का काम किया। यहां तक कहा गया कि “चार लाठी मारकर तुम्हें ही फ्रॉड में बंद कर देंगे।
एक तरफ पीड़ित परिवार फायरिंग की घटना बता रहा है। दूसरी तरफ पुलिस बिना निष्पक्ष जांच किए कोर्ट को अलग-अलग रिपोर्ट भेज दे रही है। दोनों रिपोर्टों में विरोधाभास होने से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
मामला अब केवल एक गरीब परिवार का नहीं रह गया है। बल्कि यह सवाल पूरे सिस्टम पर है। कि
अगर थाना स्तर पर ही न्याय का गला घोंटा जाएगा, तो आम जनता किस पर भरोसा करेगी।
सूत्रों की मानें तो जिस व्यक्ति पर आरोप लग रहा है। उसका वर्षों पुराना जमीन विवाद भी सामने आ रहा है। आरोप यह भी है। कि पुलिस पूरे मामले को “जमीनी विवाद” बताकर असली अपराध को बचाने में जुटी हुई है।
अब सवाल यह उठता है। कि
क्या इलियां थाना पुलिस सच छुपाने का प्रयास कर रही है।
क्या निष्पक्ष जांच से बचने के लिए गरीब परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे मामलों को अपने संज्ञान लेंगे
जनता और मीडिया अब मांग कर रही है। कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
अगर गोली चलने के आरोप की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला केवल चंदौली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल बन जाएगा।
गरीब परिवार को न्याय दिलाना ही लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
रिपोर्ट जगदीश शुक्ला









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