वाराणसी।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर देशव्यापी बंदी के तहत आज वाराणसी में भी दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आयोजित इस बंदी का समर्थन वाराणसी दवा विक्रेता समिति ने किया, जिसके चलते शहर की थोक एवं रिटेल की लगभग 6000 दवा दुकानें बंद रहीं। हालांकि दवा विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी सेवाओं को बंदी से अलग रखा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुबह से ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। इस अभियान की शुरुआत लंका चौराहे से की गई, जहां बड़ी संख्या में दवा व्यापारी एवं समिति के पदाधिकारी एकत्र हुए। व्यापारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया तथा नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। व्यापारियों ने कहा कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा विषय है। ऐसे में इसकी बिक्री पूरी तरह नियंत्रित और नियमों के तहत होनी चाहिए।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू करने चाहिए, ताकि छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यापारियों का हित सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय मेडिकल स्टोर वर्षों से लोगों को भरोसेमंद सेवाएं दे रहे हैं, जबकि ऑनलाइन कंपनियां केवल व्यापारिक लाभ के उद्देश्य से काम कर रही हैं।
लंका चौराहे पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बंदी के चलते शहर के कई इलाकों में दवा खरीदने पहुंचे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि गंभीर मरीजों और आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए कुछ दुकानों से आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। दवा व्यापारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करना है।
इस दौरान वाराणसी दवा विक्रेता समिति के कई पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में दवा व्यापारी मौजूद रहे। आंदोलन को लेकर पूरे शहर में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।










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