वाराणसी
गंगा में नाव के ऊपर बिरयानी खाकर हड्डी और गंदगी फेंकने वाले आरोपितों को उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद सोमवार को जिला अदालत ने जमानतदार और बंधपत्र देने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश जिला जेल भेज दिया। अदालत में आरोपितों की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखा।
प्रकरण के अनुसार भारतीय जनता युवा मोर्चा वाराणसी महानगर के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि माँ गंगा सनातन धर्म अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। माँ गंगा के जल का आचमन करने लिए देश- विदेश से प्रतिदिन लाखो की संख्या में श्रद्धालु बडे ही आस्था- भाव से आते है।
वही मुस्लिम समुदाय द्वारा मां गंगा की पावन धारा में नाव के ऊपर बैठकर इफ्तार के समय चिकन बिरयानी खाना और उसका अवशेष माँ गंगा में फेंकना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय कृत्य है। इनके इस घृणित कृत्य द्वारा हम सनातन अनुयायियों की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है और समस्त जनमानस मे आक्रोश व्याप्त है।
इस कृत्य के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के यह नौजवान जानबूझकर जेहादी मानसिकता को बढ़ाया दे रहे हैं। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद आज़ाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसी मामले में जिला अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपितों ने अपने अधिवक्ता विकास सिंह के जरिए उच्च न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद मंजूर कर लिया था।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इफ्तार पार्टी के आयोजन, वीडियो अपलोड करने और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए उसका इस्तेमाल करने के बारे में है। जिसकी जांच को रोका नहीं जा सकता और आवेदकों को जेल में और हिरासत में रखे बिना यह जांच जारी रखी जा सकती है।
आरोपित 17 मार्च 2026 से जेल में हैं, उन्होंने खेद जताया है और भविष्य में ऐसा कोई काम दोबारा न करने का वादा भी किया है। ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना न्यायोचित है।









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