मुमुक्ष भवन में सनातन धर्म के महत्व पर विशेष संगोष्ठी आयोजित

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वाराणसी।

काशी स्थित मुमुक्ष भवन के सभागार में सनातन धर्म के महत्व और उसकी वर्तमान समय में प्रासंगिकता को लेकर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में प्रख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज के शिष्यों एवं स्थानीय संत-महात्माओं ने सहभागिता कर धर्म, संस्कृति और भारतीय परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, धर्मप्रेमी और युवा उपस्थित रहे।

संगोष्ठी का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सभागार में भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों को श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र पद्धति है, जो मानवता, करुणा, सत्य और सेवा का संदेश देती है।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी परंपराओं और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में संत-महात्माओं का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहा है।

प्रेमानंद जी महाराज के शिष्यों ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म विश्व को “वसुधैव कुटुंबकम्” का संदेश देता है। यह धर्म मानवता को जोड़ने और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा सद्भाव की भावना विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सनातन परंपराओं में निहित हैं और इन्हीं मूल्यों के कारण भारत को विश्वगुरु कहा जाता है।

संतों ने यह भी कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करना, दूसरों की सहायता करना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाना भी धर्म का ही स्वरूप है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय ग्रंथों, गीता, रामायण और वेदों के ज्ञान को समझें तथा अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाएं।

कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक चर्चा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कई वक्ताओं ने सनातन धर्म पर हो रहे भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और आधुनिक माध्यमों के जरिए सही धार्मिक जानकारी समाज तक पहुंचाना समय की मांग है।

संगोष्ठी में उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का कार्य करते हैं। श्रद्धालुओं ने संतों के विचारों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलेगी।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी संत-महात्माओं और अतिथियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला।

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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