इलिया (चंदौली)
धान की फसल के इस महत्वपूर्ण दौर में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही इलिया सहकारी समिति पर किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को खाद लेने के लिए समिति परिसर में किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। किसान घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी भी साफ नजर आई।
किसानों का कहना है कि समिति पर जरूरत के मुताबिक खाद की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर समिति पर खाद की बोरियां कम मात्रा में क्यों पहुंच रही हैं? क्या ऊपर से ही कम खाद उपलब्ध कराई जा रही है, मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? इसे लेकर किसानों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
किसान हिफ़ज़ूर रहमान ख़ान ने बताया कि उनके पास करीब 10.5 हेक्टेयर खेत है, लेकिन अभी तक उन्हें एक भी बोरा खाद नहीं मिला था। मंगलवार को जब वह खाद लेने समिति पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उन्हें केवल पांच बोरी खाद ही मिल सकती है। किसान ने सवाल उठाते हुए कहा कि 10.5 हेक्टेयर खेत के लिए पांच बोरी खाद से आखिर कितनी जरूरत पूरी होगी?
किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समय है। यदि समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हुई तो इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है। सीमित मात्रा में खाद मिलने से किसान अपनी जरूरत पूरी करने के लिए परेशान हैं।
खबरें प्रकाशित होने के बाद भी व्यवस्था जस की तस
खाद की किल्लत और किसानों की परेशानी को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होती रही हैं। किसानों का कहना है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लेने की बात सामने आती है, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि आखिर शिकायतों और खबरों के बाद ठोस कार्रवाई कब होगी?
वितरण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ किसानों ने खाद के आवंटन और वितरण में अनियमितता की आशंका भी जताई है। हालांकि, किसी अनियमितता की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन और कृषि विभाग को समिति के स्टॉक रजिस्टर, प्राप्त खाद की मात्रा, वितरण रजिस्टर और किसानों को दी गई खाद के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। इससे साफ हो सकेगा कि समिति को कितनी खाद प्राप्त हुई, कितनी वितरित की गई और वर्तमान में कितना स्टॉक उपलब्ध है।
किसानों का कहना है कि यदि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो उसका रिकॉर्ड सामने आने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं, जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब अधिकारियों पर टिकी किसानों की नजर
खाद की समस्या को लेकर अब किसानों की नजर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों पर टिकी है। किसानों का सीधा सवाल है कि आखिर खाद की किल्लत का जिम्मेदार कौन है? समिति पर पर्याप्त मात्रा में खाद क्यों नहीं पहुंच रही है और लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो रहा है?
किसानों ने प्रशासन से तत्काल मामले का संज्ञान लेने, समिति की खाद उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की जांच कराने तथा धान की फसल की जरूरत को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।










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