एसडीएम कार्यालय बना ‘आरामगाह’, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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मीरजापुर |

बुधवार को ठीक 11 बजकर 57 मिनट पर एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया। स्थानीय उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने दो व्यक्ति कुर्सियों पर बैठकर गहरी नींद में सोते हुए दिखाई पड़े। यह नजारा न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है, जहां से कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने की अपेक्षा की जाती है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों व्यक्ति काफी देर तक उसी स्थिति में बैठे रहे और आसपास से गुजरने वाले लोग उन्हें आश्चर्य भरी नजरों से देखते रहे। कार्यालय परिसर में आमतौर पर सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन उस समय किसी ने भी उन्हें हटाने या स्थिति की जानकारी लेने की आवश्यकता नहीं समझी। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई बरती जा रही है या फिर जिम्मेदार लोग अपनी ड्यूटी के प्रति उदासीन हो चुके हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये दोनों व्यक्ति कौन थे और बिना किसी रोक-टोक के संवेदनशील माने जाने वाले प्रशासनिक परिसर तक कैसे पहुंच गए। क्या वे स्थानीय लोग थे या बाहर से आए हुए व्यक्ति, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इसके साथ ही यह भी चिंता का विषय है कि यदि कोई असामाजिक तत्व इसी तरह परिसर में प्रवेश कर जाए, तो सुरक्षा व्यवस्था किस हद तक सक्षम साबित होगी।

इस घटना ने न केवल सुरक्षा प्रबंधन बल्कि प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों का मानना है कि जिस स्थान पर आम लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाता है, वहां इस प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि कार्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर ही इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है, तो अंदर की व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह घटना निश्चित रूप से एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जो यह संकेत देती है कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और सक्रिय बनाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और प्रशासनिक कार्यालयों की गरिमा एवं सुरक्षा दोनों बनी रहे।

 

रिपोर्ट भोलानाथ यादव

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