भगवान से प्रेम अनुभव का विषय है वाणी का नहीं- मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी

Picture of voiceofshaurya@gmail.com

voiceofshaurya@gmail.com

FOLLOW US:

Share

राम कथा के आठवें निशा पर राम-भरत मिलाप का प्रसंग सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता

चन्दौली इलिया

भगवान से प्रेम अनुभव का विषय है वाणी का नहीं। प्रेम की भाषा मौन होती है। इसीलिए भगवान प्रेम की बिह्वलता को परखते हैं। वह भाव के भूखे होते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में दो चीज अति सुंदर हैं एक भगवान राम का नाम और दूसरा उनकी कथा यह दोनों अति सुंदर है। जब भी मनुष्य के ऊपर विपत्ति आए तो उसको हमेशा अपना दुख संत और भगवत को सुनना चाहिए। जिससे उसके दुख मिटते हैं।

उक्त बातें क्षेत्र के खरौझा हिनौती स्थित हनुमान मंदिर पर हनुमान सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के आठवीं निशा पर काशी से पधारीं कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कहीं।उन्होंने भाई के प्रति प्रेम और आधुनिक जीवन में इसके महत्व पर कथा सुनाई गई। शुक्रवार को भरत मिलाप का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।

कथा में शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि अयोध्या से राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास जाने के बाद भरत माता कैकई के कक्ष में राम को तलाशने पहुंचे। जब उन्हें राम के वनवास की जानकारी मिली, तो वे माता कैकई को कोसते हुए रोने लगे। भरत ने कहा कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, मगर माता कुमाता नहीं हो सकती।

इस पर माता कौशल्या और सुमित्रा ने उन्हें समझाते हुए कहा कि राजा दशरथ अब इस दुनिया में नहीं रहे। इसके बाद भरत अपनी तीनों माताओं के साथ राम को वापस लाने के लिए निकल पड़े।भरत अपनी सेना और निषादराज से मार्गदर्शन लेकर चित्रकूट पहुंचे, जहां लक्ष्मण ने उन्हें देखा और राम को बताया। राम ने हंसते हुए कहा, “ठहर जाओ, अनुज भरत को आने दो।” भरत राम के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करते हैं, और राम उन्हें गले लगाते हैं।

भरत ने पिता की मृत्यु की खबर सुनाई, जिसे सुनकर राम, सीता और लक्ष्मण शोकाकुल हो गए।भरत ने राम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, परंतु राम ने पिता के दिए हुए वचन को निभाने की बात कहते हुए इनकार कर दिया।

अंत में, राम ने भरत को अयोध्या की प्रजा और माताओं की देखभाल का दायित्व सौंपा। भरत राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे और 14 वर्षों तक राज सिंहासन पर चरण पादुका रखकर खुद जमीन पर संन्यासी जीवन बिताते हुए राज्य का संचालन किया।भरत मिलाप के इस प्रसंग ने सभी श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।

इस दौरान राजन सिंह, राजू विश्वकर्मा, त्रिवेणी द्विवेदी, डॉ गीता शुक्ला, परशुराम सिंह, पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट, राजेश पटेल, प्रियंका सिंह,रोली सिंह, रूद्र प्रिया सिंह, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी 

 

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई