मनुष्य को संस्कार की बात सिखाती है राम कथा-मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी

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इलिया

मनुष्य के जीवन में भगवान की भक्ति अति आवश्यक है। क्योंकि धर्म काज से जोड़ने के लिए मनुष्य को पूजा परिवार के लिए और भक्ति भगवान के लिए करना जरूरी है। पूजा के पीछे ही भक्ति है। बिना अनुराग के भगवान इस दुनिया में मिलने वाले नहीं है। प्रेम अगर संसार से हो तो उसे राग कहते हैं और अगर प्रेम भगवान से हो तो उसे अनुराग कहते हैं। राम कथा मनुष्य को संस्कार की बातें सिखाती है।

राम कथा में जाने से मनुष्य को तमाम चीज देखने और सीखने को मिलती है। उक्त बातें क्षेत्र के खरौझा हिनौती स्थित हनुमान मंदिर पर हनुमान सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के सातवीं निशा पर काशी की कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कहीं।उन्होंने ने भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।

शालिनी त्रिपाठी ने केवट प्रसंग को अत्यंत जीवंत शैली में प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया। प्रभु राम और केवट के संवाद में केवट का अनन्य प्रेम और प्रभु राम की विनम्रता प्रकट हुई।केवट ने प्रभु राम के पांव पखारने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह बिना पांव धोए उन्हें नाव में नहीं बैठाएगा। उसने यह भी कहा कि उसे डर है कि कहीं प्रभु राम के चरणों की धूल से उसकी नाव भी नारी न बन जाए।

केवट ने सजल नेत्रों से प्रभु राम के कोमल चरणों को देखकर कहा कि राजा प्रजा को आदेश देता है, लेकिन आप जगत के मालिक होते हुए भी कितनी विनम्रता से नाव मांग रहे हैं। केवट ने प्रभु राम से उतराई के रूप में कुछ नहीं मांगा, बल्कि भक्ति का वरदान मांगा।केवट की यह भावना निष्काम भक्ति और निष्कपट प्रेम का अद्भुत उदाहरण है।

कथावाचिका ने केवट संवाद को भावपूर्ण स्वर में दोहराया, जिसमें केवट प्रभु राम से कहता है कि मैं तो यहां आपको पार लगा दूंगा, किंतु वहां भवसागर में आप मुझे पार लगा दीजिएगा। इसके बाद भजन का गायन किया गया, जिससे पूरा पंडाल भावुक हो गया।मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कहा कि श्रीराम कथा ही जीवन का श्रृंगार है। उन्होंने साधु-संतों का हमेशा सम्मान करने पर जोर दिया और यह भी कहा कि घर की बेटियां आंगन का श्रृंगार होती हैं।

कथा के दौरान श्री राम लक्ष्मण सीता और केवट की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई। जिसको देखकर के श्रोता का भी भाव विभोर नजर आए और लोगों ने प्रभु के दर्शन किए और केवट की लीला को भी निहारा।

इस दौरान राजन सिंह,विश्वनाथ द्विवेदी,परवीन वारसी,पंचदेव द्विवेदी,राजू विश्वकर्मा, त्रिवेणी द्विवेदी,रोली सिंह,प्रियंका सिंह, रूद्र प्रिया सिंह, नंदनी पांडेय सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

 

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