वाराणसी।
लखनऊ यूपी की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। महिला आरक्षण, विकास परियोजनाओं और पुराने सियासी घटनाक्रमों को लेकर भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विधानसभा में दिए गए सख्त बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
प्रधानमंत्री ने जहां विकास की बड़ी सौगात के साथ महिलाओं को साधने की कोशिश की, वहीं सीएम योगी ने विशेष विधानसभा सत्र में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सपा को “जन्मजात महिला विरोधी” बताते हुए गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया और कहा कि पार्टी के कार्यकाल में महिलाओं के साथ अत्याचार और असुरक्षा की घटनाएं आम थीं।
सीएम योगी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा ने लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए महिला आरक्षण को लागू नहीं किया, जबकि केंद्र की भाजपा सरकार इसे आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह दावा भी किया कि उनकी सरकार में महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान का माहौल मिला है, जबकि पहले वे असुरक्षित महसूस करती थीं।
गेस्ट हाउस कांड (1995) का जिक्र करते हुए योगी ने सपा पर दलित और महिला विरोधी होने का आरोप भी लगाया, जिससे राजनीतिक संदेश को और व्यापक बनाने की कोशिश दिखी। साथ ही उन्होंने शाहबानो प्रकरण, तीन तलाक और पूजा पाल मामले का उल्लेख कर सपा और कांग्रेस दोनों को कठघरे में खड़ा किया।
भाजपा ने इस पूरे राजनीतिक अभियान को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी महिला मतदाताओं और विकास के एजेंडे को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और महिला केंद्रित वादों के जरिए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।











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