नवरात्रि के चौथे दिन, देवी कूष्मांडा के दर्शन को उमड़े भक्त, मां के जयकारों से गूंज उठा मां का दरबार

Picture of Shauryanewsindia220@gmail.com

Shauryanewsindia220@gmail.com

FOLLOW US:

Share

वाराणसी    शिव की नगरी काशी में इस समय शक्ति की उपासना में डूबी हुई है। शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना को समर्पित है। काशीवासियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मां कूष्मांडा दुर्गाकुंड स्थित मंदिर में साक्षात मां विराजमान मानी जाती हैं। भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में दिखाई दीं और “जय माता दी” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।

भव्य श्रृंगार और आरती

नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है और प्रतिदिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। चतुर्थी के दिन भोर में मां कूष्मांडा का पंचगव्य स्नान कर विशेष श्रृंगार किया गया। माता को सफेद फूलों और स्वर्ण हार से सजाया गया, इसके बाद संजय दुबे ने श्रृंगार आरती कर पट खोला। दर्शन शुरू होते ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के पुजारी विकास दुबे के अनुसार इस वर्ष चतुर्थी दो दिनों तक मनाई जाएगी, इसलिए दोनों दिन माता का अलग-अलग भव्य श्रृंगार होगा।

 

मां कूष्मांडा का स्वरूप

मां कूष्मांडा को अष्टभुजा भी कहा जाता है क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। एक हाथ में जपमाला और अन्य सात हाथों में धनुष, बाण, कमंडल, कमल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं। मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी अद्भुत शक्ति से सृष्टि की रचना की थी। “कूष्मांडा” शब्द का अर्थ संस्कृत में कुम्हड़ा (पेठा) होता है और इसी कारण उन्हें पेठा चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है। भक्त पीले रंग का केसर वाला पेठा, मालपुआ और बताशा भोग के रूप में अर्पित करते हैं।

 

ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष के अनुसार मां कूष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन मां की आराधना करने से बुध ग्रह सकारात्मक फल देता है और बुद्धि का वरदान प्राप्त होता है। कहा जाता है कि मां की पूजा से व्यक्ति जीवन की सभी दुख-दरिद्रताओं से मुक्त होकर सुख और समृद्धि प्राप्त करता है।

 

भक्तों की अपार भीड़

मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध रहे। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और एक-एक कर भक्तों को सुलभ दर्शन कराया जा रहा है ताकि भीड़ के कारण कोई अनहोनी न हो। आसपास फूल-माला की दुकानों पर अड़हुल के फूल की मालाओं की सबसे अधिक मांग रही।

मां कूष्मांडा की स्तुति

पुजारी विकास दुबे के अनुसार नवरात्र के चौथे दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा ही इस आराधना का सबसे बड़ा प्रमाण है। माता के दर्शन-पूजन से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक भक्तों का उत्साह देखने को मिला।

 

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई