बनारस रेल इंजन कारखाना, वाराणसी में राजभाषा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत दिनांक 23.09.2025 को बरेका इंटर कॉलेज में हिंदी वाक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका विषय था– 1. हिंदी का विकास कैसे हो सकता है और 2. कबीर दास के सामाजिक कुरीतियों के बारे में विचार । इस प्रतियोगिता में काफी संख्या में बरेका इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने अंदाज में हिंदी भाषा के इतिहास से लेकर इसकी विकास गाथा पर विचार व्यक्त किये। साथ ही सामाजिक कुरीतियों पर कबीर दास के प्रहार को भी याद दिलाया कि कैसे कबीर दास ने समाज में जाति-पाति, छुआछूत, अंधविश्वास, धार्मिक पाखंड और आडंबरों जैसी सामाजिक कुरीतियों पर अपने दोहों और साखियों के माध्यम से कठोर प्रहार किया। इस दौरान निर्णायक मंडल ने ऑन स्पॉट विजेताओं के नामों की घोषणा किये। उल्लेखनीय है कि उक्त विजेताओं को दिनांक 26.09.2025 को आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा ।
इस अवसर पर वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी अंकुर रामपाल, बरेका इंटर कॉलेज के समन्वयक धर्मवीर सिंह, निर्णायक मण्डल में राकेश चौधरी एवं शालिनी उपाध्याय, मंच संचालन करूणा सिंह के साथ ही उमैर अहमद अंसारी, दिनेश कुमार सिंह, विकास कुमार विदिप्त (सभी शिक्षक, बरेका इंटर कॉलेज) के साथ ही राजभाषा विभाग से आलोक कुमार पाण्डेय, अरविन्द प्रताप सिंह, गुरूराजन ने अपना सहयोग प्रदान किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन विजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ अनुवादक ने किया ।राजभाषा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत बरेका में दिनांक 23.09.2025 को एक अन्य कार्यक्रम में भारतीय भाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में आठवीं अनुसूची में शामिल भारतीय भाषा के विभिन्न भाषा-भाषी बरेका कर्मी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगोष्ठी में शामिल अधिकारियों और विभिन्न भाषा-भाषी बरेका कर्मियों का स्वागत करते हुए वरिष्ठ अनुवादक आलोक कुमार पाण्डेय ने बताया कि राजभाषा हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाएं एक दूसरे की पुरक और क्षेत्रीय आवश्यकताएं है। इस अवसर पर अरविंद कुमार तिवारी द्वारा विशाखदत्त कृत मुद्राराक्षस के संस्कृत श्लोकों से संगोष्ठी का आरंभ किया गया। इसी क्रम में पियूष मिंज, सहायक कार्मिक अधिकारी ने कुडुख भाषा की रचना प्रस्तुत किया, मो. साजिद खान ने फना बुलंदशहरी द्वारा रचित पुस्तक दिवान-ए-फना के शयरी-गजल प्रस्तुत किये, बी.के.मधुकर ने मराठी कवि संत तुकाराम महाराज अभंग की रचना प्रस्तुत किया,
नितू जैसवार ने तेलगू में गिनती एवं स्वरचित कविता पाठ किया, करुणा सिंह ने मैथिली भाषा में प्रस्तुती की। अंजन कुमार साहू ने उडिया भाषा में उत्कलमणी गोपबंधु दास के चिलिका दर्शन प्रस्तुत किये। विनय कुमार रजक ने मैथिली भाषा में मैथिली हमर नामयो कविता का पाठ किया, रूपिन्दर कौर ने पंजाबी कवि शिव कुमार बतालवी की रचना रूख ( पेड़ ) प्रस्तुत की। सुश्री हिना चंद ने बांग्ला कवि डी.एल.राय द्वारा रचित जन्मोभूमि की प्रस्तुति की, प्रणव कुमार पाण्डेय ने डा. तुलसीराम द्वारा रचित मुर्दहिया प्रस्तुत किये,
इसी क्रम में यास्मीन फातिमा ने उर्दू में, सुधीर कुमार जैन ने मराठी में, गौरी शंकर सिंह ने हिंदी में अपना प्रस्तुति दिये। इस अवसर पर उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर-योजना मुकेश ओझा, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी अंकुर रामपाल सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम और संगोष्ठी का सुरुचिपूर्ण संचालन वरिष्ठ अनुवादक आलोक कुमार पाण्डेय और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ अनुवादक श्री विजय प्रताप सिंह ने किया।











Users Today : 211
Users This Year : 10869
Total Users : 23462
Views Today : 363
Total views : 46024