जहाँगीरगंज सीएचसी में वसूली राज रिश्वत दो वरना फाइल दफन स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक।

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अम्बेडकरनगर के तहसील आलापुर क्षेत्र निकट थाना जहांगीरगंज क्षेत्र में जहाँगीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों सेवा नहीं बल्कि वसूली का सिस्टम चल रहा है। आरोप इतने गंभीर हैं कि सुनकर ही व्यवस्था पर भरोसा डगमगा जाए लेकिन अफसरों की चुप्पी इस पूरे खेल को खुली छूट देती नजर आ रही है।

सी एच सी केंद्र में तैनात कम्प्यूटर ऑपरेटर अंजनी कुमार कन्नौजिया पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी दफ्तर को निजी कमाई का अड्डा बना दिया है। जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज को भी कमाई का जरिया बना लिया गया है। यहाँ सीधा फार्मूला है रिश्वत दो तो काम नहीं तो फाइल ठंडे बस्ते में गुम।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब आदमी दफ्तर के चक्कर काटते काटते थक जाता है लेकिन बिना पैसे दिए काम नहीं होता। मजबूरी में लोग अपनी जेब ढीली करने को मजबूर हैं।सबसे बड़ा सवाल आखिर एक ही कर्मचारी 8 साल से अधिक समय से एक ही कुर्सी पर कैसे जमे हुए हैं क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या फिर किसी बड़े संरक्षण में यह पूरा खेल फल फूल रहा है मामला यहीं नहीं रुकता।

आरोप है कि सी एच सी कार्यालय में आठ साल से अधिक समय तैनात है लोग बदलाव और ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं कंप्यूटर ऑपरेटर अंजनी कुमार के द्वारा क्षेत्र में जाकर निजी क्लीनिक संचालकों को कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे भी मोटी रकम अवैध वसूली जा रही है। खुद को अधीक्षक का खास बताकर खुलेआम दबंगई यहां कानून नहीं बल्कि सिस्टम चलता है।

हैरानी की बात यह है कि कई बार शिकायतें सीएमओ स्तर तक पहुंची लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यह चुप्पी सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान है।

जनता का गुस्सा अब उबाल पर है। लोग पूछ रहे हैं क्या स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेक चुका हैक्या आम आदमी को अब हर काम के लिए रिश्वत देनी पड़ेगी। आखिर कब टूटेगा यह वसूली तंत्रअगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

फिलहाल जहाँगीरगंज सीएचसी में सेवा नहीं बल्कि सिस्टम की लूट का खेल बेखौफ जारी है और जिम्मेदार अफसर तमाशबीन बने हुए हैं।

 

रिपोर्ट – पंकज कुमार

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