बाबा नीब करोरी महाराज जी की कृपा से गोरखपुर की इशिता शर्मा बनीं IAS, चौथे प्रयास में हासिल की 26वीं रैंक

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गोरखपुर:

गोरखपुर की बेटी इशिता शर्मा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय इशिता ने परम् पूज्य बाबा श्री नीब करोरी महाराज जी की कृपा और सुप्रीम पावर में अटूट विश्वास को दिया है।

इशिता का कहना है कि यूपीएससी जैसी कठिन और अनिश्चित परीक्षा में सफलता के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा भी बेहद जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से बाबा नीब करोरी महाराज जी की पूजा और स्मरण करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता रहा।

स्कूलिंग से ही तय कर लिया था IAS बनने का लक्ष्य

इशिता बताती हैं कि स्कूल के समय से ही उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था। 12वीं में टॉप करने के बाद जब उनसे पूछा गया कि आगे क्या बनना चाहती हैं, तो उन्होंने उसी समय IAS बनने की बात कही और उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी।

असफलताओं से नहीं टूटी हिम्मत

इशिता के पहले और दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हो पाया। उस समय उन्हें लगा कि शायद यह परीक्षा उनके लिए नहीं है, लेकिन परिवार के सहयोग और बाबा नीब करोरी महाराज जी में विश्वास ने उन्हें फिर खड़े होने की ताकत दी।

तीसरे प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन केवल 14 अंकों से चयन से चूक गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और चौथे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए 26वीं रैंक हासिल कर ली।

सेल्फ स्टडी और अनुशासन बना सफलता की कुंजी

इशिता ने अपनी स्कूलिंग सरस्वती बालिका विद्यालय से की और आगे की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम और एम.कॉम में पूरी की। यूपीएससी की तैयारी उन्होंने गोरखपुर में रहकर की और सेल्फ स्टडी के साथ ऑनलाइन क्लासेज की मदद ली।

परिवार और भाई का मिला पूरा साथ

इशिता के पिता डी.के. शर्मा बैंक मैनेजर हैं और मां अर्चना शर्मा गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने भाई को दिया, जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे और खुद भी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं।

लड़कियों को दिया खास संदेश

इशिता ने कहा कि सभी लड़कियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनना चाहिए। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तभी वे अपने जीवन के फैसले स्वतंत्र रूप से ले पाएंगी।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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