वाराणसी।
जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के दर्जनो आश्रम देश एवं विदेशों में स्थापित है जहां होली के अवसर पर भजन सत्संग कार्यक्रम हुआ। जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के मिडिया प्रभारी शशि दास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर के बताये कि होली के इस अवसर पर परम संत स्वामी जय गुरुबंदे जी महाराज द्वारा सत्संग भजन कार्यक्रम जय गुरुबंदे आश्रम नगवा गाजीपुर एवं जय गुरुबंदे आश्रम छितौना जाल्हुपुर वाराणसी में आयोजित हुआ।जय गुरुबंदे स्वामी जी ने बतलाये कि धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो होली हृदय के पवित्रता का प्रतीक माना जाता है
क्योंकि होली में एक दूसरे के गलतियों को भूलकर लोग आपस में हृदय से लगते हैं। होली के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला जाए तो इसका वास्तविक अर्थ उभर कर जनमानस के सामने आता है की होली जैसे पर्व का शुरुआत कैसे हुआ जब भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप के द्वारा उनकी बहन एवं प्रहलाद की बुआ होलिका के गोद में बैठाकर जलाकर मारने की जब नाकाम कोशिश की गई और होलीका जलकर राख हो गई और भक्त प्रहलाद जिंदा रह गए अर्थात असत्य पर सत्य की जीत को होली कहा जाता है।
लेकिन जलाने से पहले जब भक्त प्रहलाद से पूछा गया कि तुम जलने के लिए तैयार हो तब प्रह्लाद ने जो उत्तर दिया था कि मुझे जिसका होना था उसका मैं हो चुका हूं अर्थात जो हरि का हो जाता है उसी को हो ली कहते हैं यही कारण है कि समाज में मानव जो मानव का हो जाता है वही मानव प्रभु का भी हो जाता है। वही सच्चे अर्थों में होली का मतलब जानता है और अपने जीवन में गुरु शरण में जाकर प्रेम भक्ति मानवता को अपने दिल में धारण करके संसार से जीवन रूपी बाजी को कुसंग रूपी बैरियों से जीतकर जाता है एवं गुरु कृपा से अनुभव रूपी अबीर प्रेम रूपी पिचकारी एवं गुणगान रुपी गुलाल को पाकर धन्य हो जाता है।










Users Today : 8
Users This Year : 10666
Total Users : 23259
Views Today : 10
Total views : 45671